📅 Published on: September 7, 2026
Kapilvastupost
सिद्धार्थनगर: माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में सोमवार शाम उस वक्त स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब इंटर्नशिप कर रहे दर्जनों छात्र-छात्राओं ने प्रशासन की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पहले से आवंटित हॉस्टल कमरों को खाली कराने के तुगलकी फरमान और हॉस्टल में अवैध रूप से रह रहे बाहरी लोगों के खिलाफ छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा। आक्रोशित छात्रों ने मेडिकल कॉलेज के दोनों मुख्य गेटों पर अंदर से ताला बंद कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जो देर शाम तक जारी रहा।
आवास के अधिकार पर हमला: 6×9 फीट के कमरे में 4 छात्राओं को रखने की साजिश
प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं का कहना है कि उन्हें कॉलेज प्रशासन की ओर से नियमत: कमरा आवंटित किया जा चुका है। इसके बावजूद अब उन पर हॉस्टल खाली कर बाहर किराए पर रहने का दबाव बनाया जा रहा है। छात्राओं का आरोप है कि उन्हें अमानवीय परिस्थितियों में धकेला जा रहा है; महज 6×9 फीट के छोटे से कमरे में 4-4 छात्राओं को ठूंसने का अनुचित प्रस्ताव दिया जा रहा है। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि दिन-रात मरीजों की सेवा में लगे इंटर्न डॉक्टरों के बुनियादी आवासीय अधिकारों और मानसिक शांति के साथ यह खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अवैध कब्जों पर मेहरबानी, वाजिब छात्रों पर बेदखली का चाबुक
छात्रों ने हॉस्टल प्रबंधन की मंशा पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि हॉस्टल परिसर में करीब 15 बाहरी लोग अवैध रूप से रह रहे हैं, जिनसे कथित तौर पर कमरे का किराया वसूला जा रहा है। छात्रों ने तीखा सवाल उठाया कि जब बाहरी और गैर-संस्थागत लोगों को हॉस्टल में पनाह दी जा सकती है, तो दिन-रात सेवाएं दे रहे मेडिकल कॉलेज के अधिकृत इंटर्न छात्रों को बेघर करने पर प्रशासन क्यों आमादा है?
प्रशासन की बेरुखी और उत्पीड़न का खौफ
प्रदर्शन के दौरान स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश मोहन अपनी गाड़ी से पहुंचे, लेकिन छात्रों का आरोप है कि उन्होंने गाड़ी से उतरकर आंदोलनकारी छात्रों की समस्याएं सुनना तक मुनासिब नहीं समझा।
वहीं, कॉलेज प्रशासन के रुख से सहमे छात्रों ने ऑन-कैमरा बयान देने से साफ इनकार कर दिया। छात्रों ने आशंका जताई कि अगर वे मीडिया के सामने खुलकर बोलेंगे, तो प्राचार्य और कॉलेज प्रशासन उन्हें व्यक्तिगत रूप से टारगेट कर उनके करियर व अकादमिक भविष्य को नुकसान पहुंचा सकता है। इस डर के बावजूद छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराना जारी रखा।
मौके पर पहुंची पुलिस force, आधिकारिक बयान का इंतजार
हंगामा और गेटबंदी की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को संभालने का प्रयास करने लगा। देर शाम तक छात्रों का प्रदर्शन जारी रहा। इस पूरे प्रकरण में कॉलेज प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक पक्ष या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और हॉस्टल में बाहरी लोगों पर कार्रवाई कर छात्रों को उनके जायज अधिकार नहीं मिलते, उनका आंदोलन जारी रहेगा।