डॉक्टर ऑफ़ द मंथ:  इंटरनेट पर सर्च करके स्वयं इलाज से बचें , बच्चों की मुस्कान और सेहत के लिए हो सकता है खतरा  – बच्चों के स्पेशलिस्ट डॉ. ज़ैद आरिफ़ अब्बासी

डिजिटल युग में बच्चों की सेहत, सही पोषण और उनका शारीरिक व मानसिक विकास हर माता-पिता के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन चुका है। हमारी विशेष श्रृंखला डॉक्टर ऑफ़ मंथ के तहत आज हम आपकी मुलाकात करवा रहे हैं शहर के जाने-माने नवजात शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ज़ैद आरिफ़ अब्बासी (MBBS, DCH, DNB) से। डॉ ज़ैद वर्तमान में सिद्धार्थ नगर के जाने माने डॉ चंद्रेश उपाध्याय के V P L हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं |  

इस खास बातचीत में डॉ. ज़ैद ने नवजात शिशुओं की शुरुआती देखभाल, बदलते मौसम में बीमारियां, बढ़ते स्क्रीन टाइम के खतरे और बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाने के अचूक उपायों पर बेबाक चर्चा की। डॉ. ज़ैद आरिफ़ अब्बासी (Dr. Zaid Arif Abbasi) ने MBBS भोपाल यूनिवर्सिटी  , DCH भारती विद्द्यापीठ पूना और DNB [PEDIATRICS] में विशेषग्यता महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज हरयाणा से हासिल करी  है | प्रस्तुत हैं इस इंटरव्यू के मुख्य अंश:

प्रश्न 1: डॉ. अब्बासी, एक वयस्क (Adult) मरीज अपना दर्द खुद बता सकता है, लेकिन एक बच्चा केवल रोकर अपनी बात रखता है। ऐसे में बीमारी की सटीक पहचान करना कितना चुनौतीपूर्ण होता है?

डॉ. ज़ैद आरिफ़ अब्बासी बताते हैं कि यह वाकई इस पेशे की सबसे बड़ी चुनौती और सुंदरता दोनों है। छोटे बच्चे अपनी तकलीफ शब्दों में बयां नहीं कर सकते, इसलिए हमें उनकी बॉडी लैंग्वेज, रोने की शैली, चिड़चिड़ेपन ,बच्चे का शरीर कब गर्म और कब ठंढा है और सबसे महत्वपूर्ण—माता-पिता के ऑब्जर्वेशन (देखरेख) पर निर्भर रहना पड़ता है। हम कह सकते हैं कि एक पेडियाट्रिशियन को डॉक्टर के साथ-साथ थोड़ा जासूसी हुनर भी अपनाना पड़ता है। इसलिए बच्चे को जब भी तकलीफ हो उसे विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाएं क्योंकि बच्चा अपनी तकलीफ खुद से नहीं बता सकता ऐसी स्थित में उसे EXAMINE [ परिक्षण  ] किये बिना नहीं बताया जा सकता है EXACTLY कि बच्चे को हुवा क्या है |

प्रश्न 2: नवजात शिशु (Newborn) के जन्म के शुरुआती 6 महीनों में अक्सर मातापिता घबरा जाते हैं। इस दौरान सबसे महत्वपूर्ण बातें क्या हैं?

डॉ. ज़ैद आरिफ़ अब्बासी: शुरुआती 6 महीनों में सबसे पहला और सबसे जरूरी नियम है—केवल और केवल मां का दूध‘ (Exclusive Breastfeeding)। इस दौरान बच्चे को पानी की एक बूंद भी ऊपर से देने की जरूरत नहीं होती। इसके अलावा, बच्चे को सही तापमान में रखना, स्वच्छता (Hygiene) का ध्यान रखना और समय पर सभी आवश्यक टीके (Vaccinations) लगवाना बेहद जरूरी है।

प्रश्न 3: कई बार मातापिता बच्चे को बुखार या जुकाम होने पर खुद ही मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक सिरप ले आते हैं। यह कितना खतरनाक है?

डॉ. ज़ैद आरिफ़ अब्बासी: यह बहुत ही नुकसानदायक प्रवृत्ति है। बच्चों में 80 से 90% बुखार या सर्दी-जुकाम वायरल इंफेक्शन के कारण होते हैं, जहाँ एंटीबायोटिक दवाओं की कोई भूमिका नहीं होती। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक देने से बच्चे के शरीर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस बन जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि भविष्य में जब सच में किसी गंभीर बीमारी में एंटीबायोटिक की जरूरत होगी, तो वे दवाएं काम करना बंद कर सकती हैं।

प्रश्न 4: आजकल बहुत छोटे बच्चे भी बिना मोबाइल या टीवी देखे खाना नहीं खाते। इस बढ़ते स्क्रीन टाइम का बच्चों के विकास पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?

डॉ. ज़ैद आरिफ़ अब्बासी: मेडिकल गाइडलाइंस के अनुसार 2 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए जीरो स्क्रीन टाइम होना चाहिए। अत्यधिक स्क्रीन टाइम से बच्चों में भाषा का विकास (Speech Delay) रुक रहा है, वे बोलना देरी से सीख रहे हैं, आंखें कमजोर हो रही हैं और उनमें चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है। खाना खिलाते समय बच्चों को स्क्रीन की नहीं, बल्कि माता-पिता से बातचीत और जुड़ाव की जरूरत होती है। बड़े बच्चों को जो स्कूल जा रहे हैं उन्हें शिक्षा से जुड़े सीखने वाले टॉपिक्स से रिलेटेड वीडियो देखने के लिए प्रेरित करें एंटरटेन करने के लिए नहीं बच्चा अगर जिद भी कर रहा है तो उसे मोबाइल देकर अपना पीछा न छुड़ाएं यह ठीक नहीं |

प्रश्न 5: ऐसे कौन से खतरे के संकेत (Warning Signs) हैं, जिन्हें देखकर मातापिता को बिना देर किए तुरंत डॉक्टर के पास भागना चाहिए?

डॉ. ज़ैद आरिफ़ अब्बासी: यदि माता-पिता इनमें से कोई भी लक्षण देखें तो बिल्कुल भी लापरवाही न बरतें: बच्चा अचानक बहुत सुस्त हो जाए या रिस्पॉन्स देना बंद कर दे। तेज सांस चलना या सांस लेते समय बच्चे की पसलियां खिंचना। लगातार उल्टी होना और शरीर में पानी की कमी (Dehydration) के लक्षण दिखना। 102°F या उससे तेज बुखार जो दवा देने के बाद भी न उतरे।

सवाल: बच्चों के लिए दुनिया की सबसे बेहतरीन इम्यूनिटी बूस्टर चीज़?

डॉ. ज़ैद आरिफ़ अब्बासी के अनुसार घर का बना ताजा संतुलित भोजन और 8-10 घंटे की पूरी नींद। क्योंकि सोने से बच्चे के मष्तिष्क का विकास होता है उसकी मेमोरी बढ़ती है |

सवाल: बच्चे के बेवजह रोने का सबसे आम कारण?

डॉ. ज़ैद आरिफ़ अब्बासी: पेट में गैस होना या मां का अहसास (Comfort) चाहना।

सवाल: आज के माता-पिता को आपकी एक सबसे बड़ी सलाह?

डॉ. ज़ैद आरिफ़ अब्बासी: ‘परफेक्ट पेरेंट’ बनने के दबाव से बाहर निकलें। अपने बच्चे को समय दें और उसकी तुलना कभी दूसरे बच्चों से न करें। समय पर संतुलित डाइट [ भोजन ] दें | जंक फ़ूड पैकेट या पाउच वाले फ़ूड से बचें घर के खाने पर ज्यादा फोकस करें | यह बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए जरूरी है |

बच्चों का स्वास्थ्य ही हमारे समाज का उज्ज्वल भविष्य है। डॉक्टर ऑफ़ मंथ कॉलम के माध्यम से हमारी कोशिश रहती है कि आप तक स्वास्थ्य जगत की प्रामाणिक और सही जानकारी पहुंचे। डॉ ज़ैद के पिता स्वर्गीय डॉक्टर अब्बासी साहब सिद्धार्थ नगर के बहुत पुराने बच्चो के डॉक्टर थे पढाई के दौरान उन्होंने बाल रोग विशेषज्ञ बनने की इच्छा फैमिली बैकग्राउंड इंट्रेस्ट से मिली  |

अगर आपके मन में भी बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा कोई सवाल है, तो हमें कमेंट सेक्शन में लिखकर जरूर बताएं। या डॉ ज़ैद साहब को व्हाट्सप्प पर मैसेज कर सकते है आपके सवालों के जवाब रात नौ बजे से रात दस बजे के बीच सलाह देंगे |