इटवा में स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ प्रेस क्लब और राष्ट्रीय पत्रकार एकता संघ का बड़ा मोर्चा, DM-CMO को सौंपा ज्ञापन

राहुल सिंह व भारत कनौजिया के नेतृत्व में निष्पक्ष जांच की मांग; नवजात मौत के पीड़ित और किडनी रोगी भी पहुंचे

निजाम अंसारी

सिद्धार्थनगर/इटवा। इटवा क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की संदिग्ध कार्यप्रणाली और विभिन्न स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों से जुड़े मामलों को लेकर सोमवार को प्रेस क्लब उत्तर प्रदेश एवं राष्ट्रीय पत्रकार एकता संघ ने संयुक्त रूप से बड़ा मोर्चा खोल दिया। राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेस क्लब अविनाश आजाद शुक्ला के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिंह एवं सिद्धार्थनगर जिलाध्यक्ष भारत कनौजिया के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सुबह करीब 11 बजे जिलाधिकारी (DM) और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) सिद्धार्थनगर को ज्ञापन सौंपकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।

इस दौरान राष्ट्रीय पत्रकार एकता संघ ने भी स्वास्थ्य महकमे के रुख पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की पैरवी की। ज्ञापन देने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल के साथ नवजात शिशु की मौत से पीड़ित परिवार और किडनी रोग से ग्रसित मरीज भी मौजूद रहे। दोनों पीड़ितों ने अधिकारियों के समक्ष अपनी आपबीती सुनाते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में हुई लापरवाही की पारदर्शी जांच और दोषियों की जवाबदेही तय करने की गुहार लगाई।

जनता सेवा अस्पताल मामले में उठे गंभीर सवाल

ज्ञापन में इटवा स्थित ‘जनता सेवा अस्पताल’ की सीलिंग कार्रवाई, दर्ज एफआईआर, कथित तौर पर सील कटिंग का वायरल वीडियो और अस्पताल परिसर से बरामद हुई लगभग 50 डिग्रियों व स्टाम्प पेपर के संवेदनशील मामले की गहन जांच की मांग की गई है।

शिकायतकर्ताओं ने सीधा सवाल उठाया है कि यदि सीलिंग व जांच के दौरान ये दस्तावेज मिले थे, तो उनकी प्रामाणिकता, स्रोत, स्वामित्व और संभावित दुरुपयोग की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? वहीं, सूत्रों के हवाले से यह गंभीर दावा भी सामने आया है कि जब्त दस्तावेज गुपचुप तरीके से वापस कर दिए गए हैं और अब अस्पताल का नाम बदलकर नए सिरे से फर्जी तरीके से पंजीकरण कराने की कवायद चल रही है।

रजिस्ट्रेशन किसी और के नाम, संचालन कोई और कर रहा?

पत्रकार संगठनों ने ज्ञापन के माध्यम से क्षेत्र के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के वास्तविक संचालन, बैकएंड प्रबंधन, आर्थिक लेन-देन और उनमें संलिप्त व्यक्तियों की संदिग्ध भूमिका पर निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही मामले से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स और साक्ष्यों को नियमानुसार खंगालने पर जोर दिया है।

इसके अतिरिक्त, लक्ष्मी अल्ट्रासाउंड एवं सीटी स्कैन सेंटर, पूर्वा डायग्नोस्टिक सेंटर तथा पीसी डायग्नोस्टिक सेंटर से संबंधित जांच व जारी नोटिसों की प्रक्रिया को भी समग्र जांच के दायरे में शामिल करने की बात कही गई है।

साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और कोर्ट जाने की चेतावनी

प्रेस क्लब एवं राष्ट्रीय पत्रकार एकता संघ ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा पूर्व में की गई विभागीय कार्रवाई, जांच रिपोर्ट, कारण बताओ नोटिस और पंजीकरण संबंधी अभिलेखों में संबंधित अधिकारियों की भूमिका पारदर्शी होनी चाहिए। ज्ञापन में मांग की गई है कि सभी पुराने साक्ष्यों व दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जाए तथा नए पंजीकरण की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाकर जांच की जाए।

शिकायतकर्ताओं ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की ओर से निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई, तो आवश्यकता पड़ने पर प्रकरण से जुड़े सभी दस्तावेज और साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। प्रतिनिधिमंडल ने एक स्वर में मांग की है कि नवजात की मौत और किडनी पीड़ित मरीज के मामले सहित पूरे स्वास्थ्य फर्जीवाड़े की रिकॉर्ड-आधारित जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।