सिद्धार्थ नगर – स्वास्थ्यविभागकेकईनटवरलालों पर लटकी बर्खास्तगी की तलवार

एनआरएचएम के तहत स्टाफ नर्सों की नियुक्ति में हुई फजीर्वाडे. को लेकर डीएम ने दिए थे जांच के आदेश दो बहनों समेत आठ लोग रडार पर, स्वास्थ्य विभाग ने सभी संदिग्धों को नोटिस देकर मांगा कई अभिलेख

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स्वास्थ्य विभाग में वर्ष 2008 से 2010 तक एनआरएचएम के तहत हुई संविदा स्टाफ नर्सों में कई नटवरलालों पर बर्खास्तगी की तलवार लटकने लगी है।

डीएम ने इस नियुक्ति की जांच कराने का आदेश देकर सभी संदिग्धों की धड़कने बढ़ा दी है। इन संदिग्धों में वह दो बहने भी शामिल हैं, जो अक्सर विवादों में रहती हैं। मालूम हो कि वर्ष 2008 से 2010 तक एनआरएचएम के तहत कई पदों पर नियुक्ति हुई थी। जिसमें स्टाफ नर्स भी शामिल थी।

सूत्रों के मुताबिक राजनीतिक संरक्षण के चलते कईयों की नियुक्ति गलत तरीके से कर दी गयी। इस नियुक्ति को लेकर कई बार शिकायत की गयी, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। एक वर्ष पूर्व इन नियुक्तियों को लेकर एक बार फिर शिकायत हुई।

जिस पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने गंभीरता दिखाते हुए जांच कराने का आदेश दिया। सर्वाधिक फजीवाडा स्टाफ नर्स संवर्ग में हुई थी। बताया जाता है कि जांच का आदेश जब मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय पहुंची तो स्वास्थ्य कर्मियों में हड़कंप मच गया।

सीएमओ ने इस मामले की जांच एसीएमओ आरसीएच को सौंप दी गयी। जांच मिलते ही उन्होंने इन तीन सालों में नियुक्ति पायी स्टाफ – नर्सों से उनकी समस्त अभिलेख तलब किया, मगर नोटिस पहुंचने के बाद भी संदिग्धों ने अभी तक अभिलेख जमा नहीं किया है।

इससे उनकी दबंगई जग जाहिर हो रही है। बताया जाता है कि अभी हाल में इस मामले को लेकर आरटीआई भी मांगी गयी है। इसके बाद विभागीय अफसर हरकत में आ गये है।

सूत्र बताते हैं कि इन नटवरलालों ने विभागीय अफसरों को गुमराह कर नियुक्ति पायी है, मगर अब डीएम द्वारा जांच के आदेश के बाद इस मामले में संदिग्धों के हाथ पांव फूल गये हैं।

इस मामले को लेकर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. डी. के. चैधरी ने बताया कि इन सबकी जांच की जा रही है। जल्द ही जांच पूरी हो जायेगी। उन्होंने बताया कि जो भी गलत पाया जायेगा, उसे बख्शा नहीं जायेगा।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि अब स्वास्थ्य विभाग के इन नटवरलालों पर बर्खास्तगी की तलवार लटक रही है।