📅 Published on: August 17, 2024
Nizam Ansari
शोहरतगढ़ तहसील में आज समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों ने शोहरतगढ़ तहसील के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पीड़ितों को मुआवजा सहित शासन द्वारा निर्धारित लाभ अविलंब सुनिश्चित किए जाने के संदर्भ में महामहिम राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन उप जिला अधिकारी को दिया।
ज्ञापन में बाढ़ के दौरान मैरूंड गांव में पात्र सभी किसानों को अविलंब मुआवजा सुनिश्चित किए जाने,मटियार उर्फ भुतहवा, खैरी उर्फ झुगहवा, तौलिहवा, मोहनकोली, तालकुंडा, मनिकौरा गांवों में मुआवजा सूची को पूरा कर किसानों को लाभ प्रदान करने, राजा कोहा उर्फ़ प्रतापपुर राजस्व ग्राम में एक भी पैकेट बाढ़ राहत सामग्री प्रदान नहीं किए जाने, प्रतापपुर के अनिल पासवान एवं उनके परिजनों का 25 बीघे खेत की फसल नष्ट हो गई उसके बाद भी मुआवजा नहीं मिलने,तौलिहवा ग्रामसभा के बालानगर, कचीरिहवा, फुलवरिया, लालपुर में 276 से अधिक लोगों को मुआवजा नहीं मिलने,बालानगर में बाढ़ से 13 मकान ध्वस्त हुए लेकिन सभी मकान का मुआवजा नहीं मिला पाया है।
प्रत्येक वर्ष बालानगर बाढ़ की विभीषिका से त्रस्त रहता है ऐसे में तौलिहवा में ग्राम समाज की 7 बीघे से अधिक जमीन है जिस पर बालानगर के 168 परिवार को बसाए जाने के लिए विचार करने एवं शासन स्तर पर इस संदर्भ में रिपोर्ट जनहित में भेजने,नौडीहवा में बाढ़ की चपेट में एक घर बह गया जबकि 25 घर खतरे की जद में है। ऐसे में बांध एवं कटान की मरम्मत तत्काल किए जाने, तालकुंडा में 720 परिवारों को मुआवजा अभी तक नहीं मिलने, बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा दिए जाने हेतु बंद पड़ी फीडिंग प्रक्रिया को चालू करवाये जाने सहित प्रशासनिक शिथिलता को समाप्त कर बाढ़ पीड़ितों को मानवीय आधार पर संभव मदद एवं सहयोग किया जाने का उल्लेख किया गया है।
समाजवादी शिक्षक सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री मणेन्द्र मिश्रा के नेतृत्व में ज्ञापन देने वालों में सर्वश्री हरिनारायण यादव विधानसभा अध्यक्ष शोहरतगढ़, शकील शाह जिला अध्यक्ष अल्पसंख्यक,मो. जावेद ,रामू यादव, मो.शफात, रामानंद चौहान,डॉ अमित शर्मा, संदीप साहनी, अजय चौरसिया, मो. शफात, सूरज भास्कर, अब्दुल सऊद, निसार अहमद, छेदी, चंद्रिका, विश्वनाथ, रामसागर, राममिलन, पारस, अजोमती, लक्ष्मी सहित सैकड़ों किसान शामिल रहे।
सूत्र बताते हैं कि बाढ़ के लिए शासन के तरफ से एक कोटा निर्धारित हुवा था जिसके बाद से फीडिंग शासन स्तर से बंद कर दी गई । ग्राम पंचायत खैरा के कई टोलों से लेखपाल द्वारा कागजात इकट्ठा किया जा रहा था गांव के एक टोला धनौरा में लेखपाल द्वारा बाढ़ पीड़ितों का कागजात ही नहीं लिया गया। उसके बाद भी प्रशासन अपनी पीठ थपथपा रहा है।