सिद्धार्थ नगर – मदरसा बोर्ड की संवैधानिक वैधता बहाल किए जाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का किया स्वागत

मदरसों से जुड़ी समस्याओं को लेकर मणेंद्र मिश्रा ने दिया ज्ञापन सपा नेता ने की मदरसों में रिक्त पड़े पदों पर नियुक्ति, लंबित वेतन एवं छात्रवृत्ति समय से देने की मांग

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सिद्धार्थनगर में मदरसों से जुड़ी समस्याओं के समाधान हेतु समाजवादी शिक्षक सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री मणेन्द्र मिश्रा ‘मशाल ने आज राजधानी लखनऊ में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग,इंदिरा भवन में उप निदेशक श्री एस. पी. तिवारी को ज्ञापन सौंपा।

5 नवंबर को पूर्व सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूपी मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम 2004 की संवैधानिक वैधता बहाल किए जाने का निर्णय आने पर श्री मिश्रा ने तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 2016 की नियमावली के आधार पर मदरसों की समस्याओं के निस्तारण का आग्रह किया।

ज्ञापन में प्रमुख रूप से मदरसों में रिक्त पड़े पदों पर नियुक्ति, शिक्षकों का लंबित वेतन दिए जाने एवं छात्रवृत्ति समय से मिलने संबंधित बिंदु शामिल है।

मणेन्द्र मिश्रा ‘मशाल’ ने बताया कि 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री मुलायम सिंह यादव ने मदरसों में शिक्षा बेहतर करने,बच्चों के रोजगार सृजन के मौके उपलब्ध कराना और मदरसों का आधुनिकीकरण के उद्देश्य से यूपी मदरसा एक्ट बनाया था।

22 जुलाई 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी सरकार में मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा बनाए गए उत्तर प्रदेश मदरसा विनियम 2016 अस्तित्व में आया।

जिसके तहत मदरसों की मान्यता,प्रशासन, सेवा के लिए विनियमावली परिभाषित किया गया है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का मदरसा एक्ट के संदर्भ में निर्णय स्वागतगोग्य है।