📅 Published on: November 25, 2024
Amir Rizvi
अनुशासनहीनता कार्यों में लापरवाही सहित लोगों को भड़काने के आरोप में उपजिलाधिकारी इटवा कल्याण सिंह मौर्य ने लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष अजय गुप्ता को प्रशासनिक जांच में दोषी पाए जाने पर लेखपाल पद से बर्खास्त कर दिया है।
एसडीएम इटवा की ओर से हुई इस कार्रवाई के बाद से जनपद के लेखपाल संवर्ग और संगठन में हड़कंप मच गया है।
डीएम डॉ. राजा गणपति आर के अनुमोदन के बाद नियुक्ति प्राधिकारी, दंडन अधिकारी एव एस डी एम इटवा कल्याण सिंह मौर्य की ओर से जारी आदेश में उल्लेख किया गया है कि इटवा तहसील में एक दशक से कार्यरत लेखपाल, जिलाध्यक्ष उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ अजय कुमार गुप्त पर कई गंभीर आरोप में उन्हें सेवा से बर्खास्त किया गया है।
इटवा में 10 वर्ष से अधिक होने के बाद 27 जून 2024 को इनका स्थानांतरण शोहरतगढ़ तहसील के लिए हुआ पर कार्यमुक्ति के दिनांक से अनाधिकृत रूप से ड्यूटी से अनुपस्थिति की अवधि मूल नियम-17 से आच्छादित है। यह उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवज्ञा एवं अनुशासनहीनता के दोषी है।
संगठन के जिलाध्यक्ष होने का हवाला देते हुए स्थानांतरण न करने की प्रत्यावेदन पर एसडीएम की दलील है कि पदाधिकारी का स्थानांतरण उनके पदधारित करने की तिथि से दो वर्ष तक नहीं किए जाएंगे का उल्लेख है जबकि 10 वर्षों से एक ही तहसील में कार्यरत हैं।
सीएचसी बांसी में चिकित्सक से उपचार करने संबंधी ओपीडी पर्चा पर किसी चिकित्साधिकारी का हस्ताक्षर एवं मुहर नहीं पाया गया। जिसे एसडीएम इटवा ने अमान्य कर दिया। यह कृत्य गलत एवं भ्रामक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करके मनमानी ढंग से चिकित्सा अवकाश पर रहने के दोषी पाए गए हैं।
बीते माह में बाढ़ के दौरान राहत एवं बचाव कार्य के दौरान अन्य लेखपालों को कार्य बहिष्कार के लिए प्रेरित किया जाना उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली-1956 के नियम-पांच के सर्वथा उल्लंघन की श्रेणी में दोषी माना गया है।
इन बिंदुओं पर अवधारित आरोपों को सिद्ध पाए जाने की दशा में लेखपाल अजय गुप्त को सेवा से पदच्युत करने की कार्रवाई की गई है।