सिद्धार्थ नगर – हरिजन आबादी की जमीन पर ग्राम प्रधान अपने ताकत के दम पर जबरदस्ती करा रहा चकरोड का निर्माण

हरिजन आबादी की जमीन पर अवैध चक मार्ग निर्माण: प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल

हरिजन आबादी की जमीन पर अवैध रूप से चक मार्ग निर्माण को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। इस मामले ने न केवल प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सामाजिक न्याय और अधिकारों की सुरक्षा की स्थिति को भी उजागर किया है।

शोहरतगढ़ तहसील अंतर्गत विकास खंड बढ़नी के तौलिहवा टोला इटहिया में हरिजन समुदाय की जमीन, जो वर्षों से उनकी जीविका का आधार रही है, पर चक मार्ग निर्माण का कार्य शुरू कर दिया गया। इस कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं कि बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए, यह निर्माण कैसे शुरू हुआ। संख्या 294 जो फारम 45 में हरिजन आबादी दर्ज है, जिसका पैमाईश नायब तहसीलदार शोहरतगढ के मौजूदगी में लेखापाल द्वारा पैमाईश किया।

ग्रामीणों का आरोप है कि लेखपाल, तहसीलदार, सेक्रेटरी और बीडीओ की मिलीभगत से यह काम कराया जा रहा है। उनका कहना है कि शिकायतों के बावजूद अधिकारियों ने मामले की अनदेखी की और कोई उचित जांच नहीं की।

ग्रामीणों का दावा है कि लेखपाल और तहसीलदार ने जमीन के नक्शे में हेरफेर कर चक मार्ग का रास्ता बनाया। वहीं, सेक्रेटरी और बीडीओ ने इस कार्य को स्वीकृति दी, जबकि यह भूमि हरिजन आबादी की थी। इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

हरिजन समुदाय का कहना है कि यह उनकी जमीन है, जिसे कानूनी तौर पर संरक्षित किया गया है। इसके बावजूद उनकी जमीन पर अवैध कब्जा करके चक मार्ग निर्माण किया जा रहा है। उनका आरोप है कि यह कार्रवाई प्रभावशाली लोगों के दबाव में की जा रही है।

ग्रामीणों ने इस मुद्दे को लेकर बड़े पैमाने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि यदि प्रशासन ने उनकी जमीन पर हुए अवैध निर्माण को तुरंत रोका और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तो वे जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन को बाध्य होंगे जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन कि होगी |

प्रधान की दबंगई से यह मामला न केवल प्रशासनिक अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है, बल्कि सरकार के सामाजिक न्याय के वादों को भी चुनौती देता है। हरिजन समुदाय को उम्मीद है कि सरकार उनके अधिकारों की रक्षा करेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।

हरिजन आबादी की जमीन पर अवैध चक मार्ग निर्माण का यह मामला प्रशासनिक तंत्र की खामियों और सामाजिक अन्याय का प्रतीक बन चुका है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर क्या कदम उठाता है, ताकि प्रभावित समुदाय को न्याय मिल सके।

बताते चलें कि शोहरतगढ़ अन्तर्गत ग्राम पंचायत तौलिहवा टोला इटहिया में गांव के पूरब गाटा संख्या 294 जो फारम 45 में हरिजन आबादी दर्ज है, जिसका पैमाईश नायब तहसीलदार शोहरतगढ के मौजूदगी में लेखापाल द्वारा पैमाईश किया।

वहीं प्रधान प्रतिनिधि रामू को मना किया गया कि यह हरिजन आबादी की जमीन है, इस पर कोई कार्य नहीं कर सकते हैं। मगर प्रधान प्रतिनिधि रामू जबरदस्ती मनरेगा द्वारा चकरोड पटाई कार्य करने के फिराक में लगे हुए थे।

तब किसी समाजसेवी ने इसकी लिखित सूचना 27 नवम्बर 2024 को तहसीलदार शोहरतगढ को दिया। समाजसेवी ने तहसीलदार को बताया कि गाटा संख्या 294 हरिजन आबादी की जमीन है। तत्पश्चात तहसीलदार शोहरतगढ के द्वारा आदेशित किया गया कि राजस्व निरीक्षक व लेखपाल जांच करके 07 दिन में आख्या दें। लेकिन आज तक कोई जांच नहीं किया गया।

वहीं इधर बुधवार को जेसीबी मशीन से उसी जमीन पर जबरदस्ती मनरेगा द्वारा चकरोड पटाई कार्य कराया जा रहा है। इस सम्बन्ध में लेखपाल व राजस्व निरीक्षक को सूचना दी गई है, मगर अभी तक हों रहे हरिजन आबादी में चकरोड पटाई कार्य को नहीं रोका गया। इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि तहसील प्रशासन की मिली भगत से अवैध कार्य हो रहा है।