📅 Published on: January 23, 2025
गुरु जी की कलम से
नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 में ओडिशा के कटक में हुआ था. उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माता का नाम प्रभावती देवी था. सुभाष चंद्र बोस बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे और पढ़ाई में तेज थे.|
नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने प्रोटेस्टेंट यूरोपियन स्कूल (वर्तमान में स्टीवर्ट हाई स्कूल) से स्कूली शिक्षा ली थी. कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज से स्नातक किया था. इंग्लैंड के कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा हासिल की थी.
उन्होंने साल 1920 में सिविल सेवा परीक्षा पास की थी. उन्होंने साल 1921 में भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन में शामिल होने के लिए अपनी उम्मीदवारी छोड़ दी।
उन्होंने इंग्लैंड के क्रैंब्रिज यूनिवर्सिटी से सिविल परीक्षा पास की, लेकिन 1921 में जब उन्हें अंग्रेजों द्वारा भारत में किए जारहे शोषण के बारे जानकारी मिली तो उसी वक्त भारत को आजाद कराने का प्रण ले लिया और इंग्लैंड में प्रशासनिक सेवा की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर भारत वापस आ गए और आजादी की मुहिम में जुट गए।
सन 1922 में सुभाष चंद्र बोस ने स्वराज नामक समाचार पत्र की स्थापना की थी।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के गुरु चितरंजन दास थे सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी का विचार आपस में मिलता नहीं था फिर भी सुभाष चंद्र बोस ने ही महात्मा गांधी को ‘राष्ट्रपिता’ कह कर संबोधित किया था. तभी से महात्मा गांधी राष्ट्रपिता कहलाने लगे।
अंग्रेजी हुकूमत के ख़िलाफ़ आवाज उठाने आंदोलन करने जनता को जागरूक करने के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस को 1921 से 1941 के बीच में 11 बार देश के अलग-अलग जेल में अंग्रेजों द्वारा कैद किया गया पता चला है कि . सुभाष चंद्र बोस उस समय जवाहर लाल नेहरू से भी ज्यादा लोकप्रिय नेता थे.।
जर्मन के तानाशाह अडोल्फ हिटलर किसी से भी एकाएक सीधे नहीं मिलता था, उसे अपनी मौत का हमेशा डर लगा रहता था, इसलिए उसने अपने जैसे कई हमशक्ल तैयार कर रख थे. ।
जब सुभाष चंद्र बोस हिटलर से मिलने जर्मनी गए तो हिटलर के हमशक्ल उनके सामने आए, लेकिन उन्होंने हिटलर के हमशक्ल को कोई तवज्जो नहीं दिया ।
तब. बादमें हिटलर ख़ुद नेताजी के पास आया तब जाकर सुभाष चंद्र बोस ने उनका अभिवादन किया. सुभाष चंद्र बोस की चतुराई देखकर हिटलर ने सुभाष चंद्र बोस को नेताजी के नाम से संबोधित किया तभी से उन्हें नेताजी की ऊपाधि मिल गयी।
हिटलर के कहने के बाद सुभाष चंद्र बोस दुनिया भर में नेताजी के नाम से विख्यात हो गए. सुषाभ चंद्र बोस को नेताजी के साथ ही देश नायक भी कहा जाता हैं सुभाष चंद्र बोस को देश नायक की उपाधि रवीन्द्रनाथ टैगोर से मिली थी.।
स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान की कोई तुलना ही नहीं की जा सकती है नेताजी द्वारा स्वतंत्रता समानता राष्ट्र भक्ति के लिए किए गए संघर्ष को भुलाया नहीं जा सकता है राष्ट्र को सर्वोपरि मानते हए मातृभूमि को अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त कराने के लिए उन्होंने अपनी सेना ‘‘आजाद हिंद फौज’’ बनाने का रास्ता चुना। इस प्रकार आजाद हिंद फौज की स्थापना हुई।
नेता जी ने उस समय राष्ट्रभक्ति एवं स्वतंत्रता का संदेश जन जन तक पहुंचाने के लिए बर्लिन में फ्री इंडिया सेंटर की स्थापना किया और आजाद हिंद रेडियो की शुरुआत किया जिसके द्वारा उस समय अंग्रेजी, गुजराती, मराठी, बंगाली, पश्तो, तमिल, फारसी और तेलुगु में प्रसारित समाचार बुलेटिन व स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े कार्यक्रम प्रसारित किए जाते थे।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा अखिल भारतीय फॉरवर्ड ब्लॉक नामक राजनीतिक इकाई की स्थापना भी की गई थी
‘‘तुम मुझे खून दो-मैं तुम्हें आजादी दूंगा’’यह नारा जो आज भी देश के हर नागरिक व युवाओं को राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता, कर्तव्य और जिम्मेदारी का अहसास कराता है। वह नारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस का दिया हुआ है।
‘‘दिल्ली चलो’’ का नारा देकर उन्होंने साबित कर दिया कि उनका संकल्प दृढ़ है इसी नारे के आधार पर दिल्ली चलने का अपना उद्देश्य मानकर आजाद हिंद फौज ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ीथी।
आज के दिन युवाओं और अपने बच्चों को महान स्वतंत्रता आंदोलनकारी विभूतियों के जीवन परिचय से अवगत कराना होगा और उनमें ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना पैदा करनी होगी।
नेताजीने कहा था ‘‘राष्ट्रवाद मानव जाति के उच्चतम आदर्शों, सत्यम, शिवम, और सुंदरम से प्रेरित हैं। भारत में राष्ट्रवाद ने उन रचनात्मक शक्तियों को जगाया है जो सदियों से हमारे लोगों में निष्क्रिय पड़ी थी।