सिद्धार्थ नगर – गौशाला की तर्ज पर महिष ( भैंसा ) शालाओं की ज़रूरत है

पूर्व के समय में थाने में कांजी हाउस कि व्यवस्था होती थी जहाँ जानवरों को पकड़ कर ले जाया जाता था और उसको जुरमाना लगाकर छोड़ा जाता था ,आज भी इसकी आवश्यकता महसूस कि जा रही है |

गुरु जी की कलम से

भारत और नेपाल के बीच खुलीं सीमा होने के कारण इसी सीमा से पशु तस्कर भारत से नेपाल को पशुओं की तस्करी करते हैं भारत से नेपाल को भेड़ बकरी भैंस गाय आदि पशुओं की तस्करी होती रहती है|

देश में जगह-जगह गायों को सुरक्षित रखने के लिए गौशाला का निर्माण कराया जा रहा है|

जैसे ही कोई विभाग भैंसों को लेकर जाकर पुलिस को सौंपता है तो पुलिसकर्मियों के लिए यह सबसे बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है कि आखिर वह पकड़े गए भैंसों को कहां ले जाकर के जमा करें उसके पास तो थाने में कांजी हाउस नहीं है इस समस्या से निपटने के लिए गौशालाओं के तर्ज पर ही महिष शाला के निर्माण कराए जाने की जरूरत है जिससे उसमें भैंसा या पडवा को सुरक्षित रखने के साथ ही साथ उनके भोजन पानी की व्यवस्था हो सके|

गौशालाओं में गायों को हरा चारा भूसा खली पानी दवा आदि की व्यवस्था रहती है गायों को नहाने खाने उनकी देखभाल करने के लिए तमाम प्रकारकी सुविधाएं गौशालाओं में सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है |

क्षेत्र में घूम रही छुट्टा पशुओं गायों को किसानों द्वारा पकड़ के ले जाकर के गौशालाओं मे पहुंचा दिया जाता है जहां पर उनकी उचित देखभाल होती है|

भारत नेपाल सीमा पर तस्करी गतिविधियों पर रोक थाम लगाने के लिए कई विभाग काम कर रहे हैं ,सरहद पर तैनात तस्करी निरोधक विभागों के कर्मचारी द्वारा भारत से नेपाल को तस्करी कर ले जाए जा रहे भैंसों को रोका और पकड़ा जाता है लेकिन उसे रखने की व्यवस्था नहीं है |

भारत से नेपाल को भैंसों की तस्करी करते समय जब भी कोई पशुओं का तस्कर पकड़ा जाता है तो उक्त पशुओं के तस्कर को हिरासत में लेकर के हवालात में डाल दिया जाता है|

उसके संबंध में वैधानिक कार्रवाई की जाती है कानून की धाराओं के तहत उसे न्यायलय भेजा जाता है|भारत से नेपाल को तस्करी कर ले जाते हुए जब सामानों को पकड़ा जाता है तो उस समान तथा कथित तस्कर को सीमा शुल्क कार्यालय में जमा करते है|

महिष शालाओं की जरूरत भारत नेपाल सीमा पर तैनात अधिकारी या कर्मचारी जब भी भारत से नेपाल तस्करी के माध्यम से ले जाने वाले भैंसा या पंडवा को पकड़ता है तो पुलिस के यहां मुकदमा लिखा करके जानवरों को जमा कर देते हैं |

थाने में पशुओं को निरूद्ध करने के लिए बहुत पहले कांजी हाउस बना हुआ करता था जिसमें पशुओं को बंद या निरुद्ध किया जाता था उस कांजी हाउस को सरकार ने बंद कर रखा है अब किसी भी थाने पर कोई कांजी हाउस नहीं है|

क्षेत्र में जो पशुओं को रखने के लिए गौशाला बने हैं उसमें भैंसों को लेने को कोई तैयार ही नहीं होता है|

वे लोग तो गौशालाओं मे गाय को ही रखते हैं जिसका परिणाम यह होता है कि पुलिस उन भैंसों को ऐसे कुछ लोगों में बांट देती है जो उन्हें ले जाकर के भैंसों का पालन पोषण करें|

पहले बैलगाड़ी चलती थी जिसमें बैलगाड़ी को खींचने के लिए बैल अथवा भैंसों की जरूरत पड़ती थी जिसके कारण भैंसों की उपयोगिता थी |अब बैलगाड़ी भी नहीं चलती है ‌तो वह पशुपालक भैंसों को कहां ले जाकर के उपयोग करें इससे अब तो खेत में हल से जुताई भी नहीं होती है|

ऐसी स्थिति में अपना आधार कार्ड देकर के इन भैंसों को किसान अपने घर ले जाना भी पसंद नहीं करता है ,इन भैंसों को तो कुछ ही लोग ले जाना पसंद करतें है जिनका इन भैंसों से कुछ छुपा हुआ स्वार्थ रहता है वही लोग इन भैंसों को अपने घर ले जाते हैं लेकिन कुछ ही दिन बाद या तुरंत ही भैंसों को फिर उन्ही तस्करों के हाथ परोक्षरूप में दे देते है|

भैंसों को फिर वही रास्ता पकड़ना पड़ता है कि वह भारत से नेपाल जाते हैं नेपाल से फिर बिहार आते हैं और बिहार से बंगाल जाते हैं और बंगाल से फिर बांग्लादेश अपने गंतव्य स्थान तक पहुंच जाते हैं|

यदि सरकार के पस गौशाला के तरीके से भैंसा शाला होता तो लोग इन पकड़े गए भैंसों को ले जाकर के इस भैंसा शाला में जमा कर देते जहां इनका पालन पोषण किया जाता है लेकिन भैंसाशालाओ के न होने के कारण पुलिसकर्मियों कस्टम के कर्मचारी और एस एस बी केअधिकारीके लिए भैंसों से समस्या खड़ी हो जाती है|

भैंसों को किसी थाने में खुला रखा भी नहीं जा सकता क्योंकि थाने में रखने पर भैंसा भूख प्यास से मरंगे साथ-साथ साथ थानापरिसर को गंदा भी करेंगे|

जब तक भारत से नेपाल को भैंसों की तस्करी हो रही है और विभाग उन्हें पकड़ रहा है भारत नेपाल सीमा पर भैंसा शाला की बहुत बड़ी आवश्यकता है जहां पर एस एस बी कस्टम और पुलिस द्वारा पकड़े गए भैंसों को ले जाकर के रखा जाए|

अभी कुछ दिन पहले। एस एस बी ,बी ओ पी महादेव द्वारा 51 भैंसों को भारत से नेपाल की तरफ तस्करी कर नेपाल में ले जाते समय पकड़ा गया था, जिसमें एक पशु तस्कर भी पकड़ा गया था|

फिलहाल पशु तस्कर के विरुद्ध मुकदमा लिख करके विधि कार्रवाई की गई लेकिन वह 51 भैंस थाने में दूसरे दिन ही नहीं दिखाई पड़े इस संबंध में जानकारी लेने पर पता चला कि इन भैंसों को कुछ किसानों को पालने के हेतु आधार कार्ड पर जमा करके उनका नाम पता लिख करके दे दिया गया है|

यदि देखा जाए तो वह किसान जिन्होंने अपना आधार कार्ड जमा कर दिए भैंसों को ले रखा है और उसका पालन पोषण करने का वादा किया है उनमें से अधिकांश के घर 24 घंटे के बाद भी भैंसों दिखाई नहीं पड़ेंगे आखिर हुए तथा कथित किसान इन को ले जाकर के क्या करते हैं इसके बारे में फिर कोई पूछताछ नहीं की जाती है सरकार को चाहिए कि तस्करी में ले जाए जा रहे भैंसों को पकड़ कर जिस थाने पर जमा किया गया है उसे थाने से किन-किन लोगों को भैंसों की सप्लाई की गई है इसके बारे में जानकारी करें|

और यदि उनके यहां वह नहीं उपलब्ध होते हैं तो फिर उन लोगों ने उस भैंसों को क्या किया यह उनसे पूछा जाए क्योंकि भारत में भैंसों की अब कोई उपयोगिता रह नहीं गई है ना तो उनके द्वारा यहां बैलगाड़ी ही खींची जा सकती है और ना ही उनके द्वारा खेती की जा सकती है और भैंसे से दूध का आशा करना तो और ही हास्य पद बात है|