📅 Published on: March 21, 2025
विश्व जल दिवस 2025: शांति की स्थापना में जल का महत्व
परमात्मा प्रसाद उपाध्याय, बढ़नी, सिद्धार्थनगर
“शांति के लिए जल”—विश्व जल दिवस 2024 की यह थीम हमें याद दिलाती है कि जब हम जल संरक्षण और इसके न्यायसंगत वितरण पर सहयोग करते हैं, तो हम न केवल प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा करते हैं, बल्कि सामाजिक सद्भाव, समृद्धि और स्थिरता को भी बढ़ावा देते हैं।
जल: जीवन, अधिकार और जिम्मेदारी
जल केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं है, बल्कि यह एक मौलिक मानव अधिकार है। यह हमारे जीवन के हर पहलू में समाहित है—पीने के लिए, कृषि और उद्योगों के लिए, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए। लेकिन दुर्भाग्यवश, बढ़ती जनसंख्या, जलवायु परिवर्तन और अव्यवस्थित जल प्रबंधन के कारण यह संसाधन संकट की ओर बढ़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1992 में ‘रियो डी जेनेरियो’ में आयोजित ‘पर्यावरण तथा विकास का संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन’ (UNCED) में विश्व जल दिवस की अंतरराष्ट्रीय पहल की गई थी। इसके तहत पहली बार 22 मार्च 1993 को विश्व जल दिवस मनाया गया और तब से हर साल यह दिन जल संरक्षण और जागरूकता के लिए समर्पित किया जाता है।
धरती पर जल संकट: आंकड़ों की नजर में
पृथ्वी का तीन-चौथाई हिस्सा जल से ढका है, लेकिन इसमें से 97% पानी खारा है और सिर्फ 3% पानी ही पीने योग्य है।
इस 3% में से भी 2% पानी ग्लेशियर और बर्फ के रूप में जमा हुआ है, यानी इंसान के उपयोग के लिए केवल 1% पानी ही उपलब्ध है।
इस 1% पानी का 60% कृषि और उद्योगों में उपयोग होता है, जबकि 40% पानी पीने, भोजन बनाने, साफ-सफाई और अन्य घरेलू कार्यों में खर्च होता है।
जल संरक्षण की परंपरागत विधियां और सामुदायिक प्रयास
भारत में प्राचीन काल से जल संरक्षण की पारंपरिक पद्धतियां प्रचलित रही हैं, जो आज भी प्रेरणादायक हैं।
1. राजस्थान – यहाँ ‘लसिपा’ पर्व मनाया जाता है, जिसमें ग्रामीण लोग मिलकर जल निकायों की सफाई और संरक्षण का कार्य करते हैं।
2. उत्तराखंड – यहाँ की परंपरा के अनुसार, सिंचाई चैनलों में “मसान” (जल आत्मा) का निवास माना जाता है, जो फसलों की सुरक्षा करता है।
3. अरुणाचल प्रदेश – ‘अपातानी जनजाति’ द्वारा जीरो घाटी में धान और मछली की सह-खेती की जाती है, जिसमें जल प्रबंधन की उत्कृष्ट तकनीकें अपनाई जाती हैं।
जल संकट: हमारी जिम्मेदारी क्या हो?
वर्षा जल संचयन को प्राथमिकता दें।
नदियों, तालाबों और कुओं की सफाई और संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करें।
जल की बर्बादी रोकने और पुनर्चक्रण (रिसाइकलिंग) को बढ़ावा दें।
सतत विकास की ओर बढ़ते हुए जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए प्रयास करें।
शांति और स्थिरता के लिए जल प्रबंधन
पानी की कमी और प्रदूषण तनाव के प्रमुख कारण बन सकते हैं, लेकिन यदि हम मिलकर साझा जल संसाधनों का समुचित प्रबंधन करें, तो यह शांति और स्थिरता का माध्यम भी बन सकता है। जल सहयोग से देशों, समुदायों और समाजों के बीच सकारात्मक संबंध विकसित होते हैं, जिससे संघर्ष कम होते हैं और सहयोग बढ़ता है।
निष्कर्ष
“विश्व जल दिवस केवल जल संरक्षण का दिन नहीं, बल्कि यह जल को जीवन, समृद्धि और शांति के स्रोत के रूप में स्वीकारने का अवसर भी है।” यदि हम जल को बचाने और उसके न्यायसंगत उपयोग की दिशा में कदम बढ़ाते हैं, तो हम न केवल अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थिर भविष्य की नींव रखेंगे, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी शांति और समृद्धि को बढ़ावा देंगे।
अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर जल संरक्षण को अपनी प्राथमिकता बनाएं और इसे केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी के रूप में देखें। “जल बचाएं, जीवन बचाएं!”