📅 Published on: April 2, 2025
नियमतुल्लाह खान
इटवा, सिद्धार्थनगर – विधानसभा क्षेत्र 305 इटवा के खुनियांव ब्लॉक में भीषण आग लगने से मानादेई, सुहेलवा, भटमली, भटंगवा, फुलवापुर, खड़रिया, बनगाई समेत कई गांवों की सैकड़ों एकड़ गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और भाजपा कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया, लेकिन तीन-तीन फायर ब्रिगेड और प्रशासनिक अमले की मौजूदगी के बावजूद किसानों की फसल को जलने से बचाया नहीं जा सका।
आग लगने की सूचना मिलते ही एसडीएम इटवा, नायब तहसीलदार, थानाध्यक्ष गोल्हौरा, नगर पंचायत अध्यक्ष इटवा श्री विकास जायसवाल, भाजपा जिला मंत्री श्री कृष्णा मिश्रा, श्री जनार्दन तिवारी, श्री झबलू बाबा, राजन पांडेय रत्न, अमरमणि दूबे, श्री अनूप पांडेय, सुनील पांडेय, हकीमुल्लाह चौधरी सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों के साथ मिलकर घंटों मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
फायर ब्रिगेड के इंतजाम फेल, आत्मनिर्भर भारत के दावे खोखले
इस भीषण अग्निकांड ने एक बार फिर अग्निशमन विभाग की लचर व्यवस्था और सरकारी तंत्र की असफलता को उजागर कर दिया। समय पर प्रभावी कदम उठाए जाते तो किसानों की मेहनत को राख होने से बचाया जा सकता था। सरकार द्वारा ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘किसान हितैषी योजनाओं’ के दावे ज़मीनी हकीकत पर खोखले साबित हो रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में अग्निशमन की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण हर साल किसानों की फसलें आग की भेंट चढ़ जाती हैं, लेकिन प्रशासनिक अमला मात्र आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है।
किसानों की बर्बादी पर कब जागेगी सरकार?
हर साल फसल पकने के समय आग की घटनाएं बढ़ जाती हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन इससे कोई सबक नहीं ले रहे। अग्निशमन विभाग के संसाधन अत्यधिक सीमित हैं, जिससे आग बुझाने में देरी होती है और किसानों की खून-पसीने की कमाई पलभर में स्वाहा हो जाती है। आखिर कब तक सरकार किसानों को सिर्फ वोट बैंक समझती रहेगी? कब तक राहत राशि और मुआवजे के नाम पर दिखावे की राजनीति होगी? किसानों की सुरक्षा के लिए सरकार को तुरंत प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।