बढ़नी – एनएच-730 बना गड्ढा मार्ग , फिर सड़क ने निगला एक ज़िंदगी का चैन , गंभीर रूप से घायल हुआ बाइक सवार

108 एंबुलेंस बुलाकर परिजनों को सूचित कर गंभीर रूप से घायल इस्लाम को जिला अस्पताल के लिए रवाना किया गया। ब्लाक मोड़ से आगे आधा दर्जन से ज्यादा जानलेवा गड्ढे जो सामान्य तौर पर दिखाई नहीं देते | 

गुरु जी की कलम से 

बढ़नी/सिद्धार्थनगर।
सरकारी घोषणाएं और अफसरों के गड्ढा-मुक्त दावे एक बार फिर राष्ट्रीय राजमार्ग-730 (एनएच-730) पर धूल फांकते नज़र आए, जब आज दिनांक 30 अप्रैल को इस्लाम नामक व्यक्ति बाइक से अपनी पत्नी के साथ डॉक्टर को दिखाने बढ़नी जा रहे थे, और अचानक एक गहरे गड्ढे से टकराकर गंभीर रूप से घायल हो गए।

हादसा उस वक्त हुआ जब इस्लाम, तुलसीपुर से बढ़नी बाजार की ओर डॉक्टर को दिखाने के लिए अपनी पत्नी के साथ बाइक से जा रहे थे। रास्ते में मड़नी और बढ़नी के बीच गहरे गड्ढों के कारण बाइक असंतुलित होकर गिर गई, जिससे इस्लाम को गंभीर चोटें आईं। स्थानीय लोगों द्वारा तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बढ़नी ब्लॉक पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने हालत को गंभीर बताते हुए उन्हें जिला अस्पताल सिद्धार्थनगर रेफर कर दिया।एनएच-730 पर गड्ढों की श्रृंखला बनी जानलेवा बढ़नी से मड़नी तक, और शोहरतगढ़ से लेकर सिद्धार्थनगर बॉर्डर तक एनएच-730 सड़क पर बड़े-बड़े जानलेवा गड्ढे मौजूद हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क पर चलना अब जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है, लेकिन संबंधित विभाग और अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।

सरकार की ओर से सड़कें गड्ढा मुक्त करने के लिए लगातार आदेश और निर्देश जारी किए जाते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत में विभागीय लापरवाही और ठेकेदारों की मनमानी से इन आदेशों की धज्जियां उड़ रही हैं।

प्रशासन और विभागीय अधिकारियों पर सवाल एनएचएआई (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के अधिकारियों की ज़िम्मेदारी है कि हाईवे की गुणवत्ता की समय-समय पर समीक्षा करें, लेकिन सवाल ये है कि गड्ढों से भरी इस सड़क पर अब तक कोई मरम्मत कार्य क्यों नहीं हुआ?

पीडब्लूडी (लोक निर्माण विभाग) और ज़िला प्रशासन की चुप्पी भी आश्चर्यजनक है।आखिर कब तक आम जनता को अपनी जान जोखिम में डालकर इस हाईवे पर चलना पड़ेगा?

स्थानीय निवासियों का आक्रोश स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि: तुरंत प्रभाव से सड़क की मरम्मत कराई जाए। गड्ढों की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं की जिम्मेदारी तय कर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।