📅 Published on: October 26, 2025
सरताज आलम की रिपोर्ट
बढ़नी/सिद्धार्थनगर।
सिद्धार्थनगर जिले के 276 प्रशिक्षित ‘आपदा मित्रों’ ने छठ पूजा जैसे महत्वपूर्ण त्योहारों पर अपनी अनिवार्य ड्यूटी लगाने और इसके बदले में सम्मानजनक मानदेय दिए जाने की पुरजोर मांग की है। आपदा मित्रों का कहना है कि वे वर्षों से निःशुल्क सेवा दे रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई है, जबकि उनके काम की सराहना मुख्यमंत्री और गृह मंत्री तक करते हैं।
छठ पर सुरक्षा की गारंटी, पर काम का दाम नहीं
आपदा मित्रों ने छठ पर्व पर ड्यूटी लगाने की अपील करते हुए तर्क दिया कि उनके पास लाइफ जैकेट जैसे आवश्यक उपकरण हैं और वे डूबने की किसी भी अनहोनी को टालने में सक्षम हैं। मनोज यादव ने बताया, “छठ के समय लोग नदी में पूजा करते हैं। उस वक्त पुलिस या जिले में एनडीआरएफ की टीम के पास लाइफ जैकेट नहीं होती है। हम तत्काल रेस्क्यू कर सकते हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि प्रशिक्षण के बाद से ही उनसे केवल नि:शुल्क कार्य लिया जा रहा है, न कोई भत्ता, न मानदेय, यहां तक कि बीमा कवर भी खत्म हो चुका है।
प्रशिक्षण पर पैसा खर्च, नौकरी नहीं तो मज़ाक
आपदा मित्रों का आरोप है कि सरकार लगातार प्रशिक्षण (12 दिवसीय आपदा मित्र, 21 दिवसीय मास्टर ट्रेनर, सर्प दंश न्यूनीकरण आदि) करा रही है, लेकिन काम नहीं दे रही। मनोज यादव ने कहा, “बार-बार ट्रेनिंग लेने से हमारी आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई है। गांव के लोग मजाक उड़ाते हैं कि बाबू की नौकरी अभी पक्की नहीं हुई।” वरिष्ठ मास्टर ट्रेनर श्याम देव यादव, जो 2006 से विभाग से जुड़े हैं, ने अपनी हताशा व्यक्त करते हुए कहा कि वह आज भी वहीं खड़े हैं जहां से शुरू किया था।
समूह सखियों को मिला भुगतान, हमें क्यों नहीं?
आपदा सखी अनुराधा ने भेदभाव का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 12 दिवसीय प्रशिक्षण के बावजूद उन्हें कोई मानदेय नहीं मिला है, जबकि समूह सखियों को सात दिवसीय प्रशिक्षण के लिए ₹300 प्रतिदिन यानी ₹2100 उनके खाते में भेज दिए गए हैं।
डुमरियागंज तहसील के सुनील कुमार यादव ने हाल ही में दशहरा के बाद डूब रहे विनोद मौर्य को अपनी जान जोखिम में डालकर बचाया था, जो आपदा मित्रों की क्षमता को दर्शाता है। राम नवल यादव, गोरीशंकर, आशीष देव यादव, अजीजुद्दीन समेत अन्य आपदा मित्रों और सखियों ने भी तत्काल ड्यूटी और आर्थिक सहायता की मांग की है।