बांसी में छठ महापर्व की छटा: डूबते सूर्य को अर्घ्य, भक्ती में डूबे लोग!
📅 Published on: October 28, 2025
Nizam Ansari
बांसी (सिद्धार्थनगर): आज लोक आस्था के महापर्व छठ के अवसर पर बांसी में भक्तों ने डूबते सूर्य को श्रद्धापूर्वक अर्घ्य दिया। गली-मुहल्लों में गूंजते छठ के लोकगीत वातावरण को भक्तिमय बना रहे हैं, जिनकी सादगी और निश्छलता हर किसी के अंतर्मन को छू रही है।
सूर्य की अलौकिक उपस्थिति और छठ की महत्ता
छठ पूजा में सूर्य देव की आराधना का विशेष महत्व है। सूर्य ही वह प्रत्यक्ष देवता हैं, जिन्हें हम अपनी आँखों से देखते हैं और जिनकी उपस्थिति को महसूस करने के लिए किसी तर्क या प्रमाण की आवश्यकता नहीं है। यह पृथ्वी, इसकी हरियाली, उर्वरता, सौंदर्य और जीवन – सब कुछ सूर्य की ही देन है। यहाँ तक कि हमारे प्यारे चंद्रमा की शीतलता भी उन्हीं की अग्नि से है।
हमारे ऋग्वेद में भी कहा गया है: ‘सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च दृ’ अर्थात ‘सूर्य ही सृष्टि की आत्मा है।’ वे ही इस सृष्टि के जनक और पालक हैं।
उदीयमान और अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य
इस महापर्व पर भक्त उदीयमान (उगते हुए) और अस्ताचलगामी (डूबते हुए), सूर्य के दोनों रूपों को अपनी श्रद्धा का अर्घ्य समर्पित करते हैं। यह अर्घ्य सूर्य के ही दिए हुए नए अन्न, फल, दूध और नदियों के जल से तैयार होता है।
भक्त प्रार्थना करते हैं कि सूर्य देव उनके अर्घ्य को स्वीकार करें और उन्हें प्रकाश, ऊर्जा, बल, आरोग्य, जीवन, हरियाली, अन्न-फल-फूल, बादल, वर्षा और नदियाँ प्रदान करें। साथ ही, यह विवेक दें कि वे उनके अंश से बनी इस पृथ्वी और प्रकृति का सम्मान और संरक्षण करें, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे बेहतर बनाया जा सके।
नगर पालिका की शानदार व्यवस्था: अध्यक्ष और प्रतिनिधि रहे मुस्तैद
बांसी में छठ पूजा के सफल आयोजन के लिए नगर पालिका बांसी द्वारा घाटों पर उत्कृष्ट व्यवस्थाएँ की गईं।
नगर पालिका अध्यक्ष चमन आरा रायनी और उनके प्रतिनिधि इदरीस पटवारी ने स्वयं पूरे कार्यक्रम की कमान संभाली।
भक्तों की सुविधा के लिए घाटों पर सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए।
अध्यक्ष और प्रतिनिधि छठ कार्यक्रम के शुरुआत से लेकर आखिरी तक लगातार घाटों पर मौजूद रहे और यह सुनिश्चित किया कि किसी भी श्रद्धालु को कोई असुविधा न हो।


