भू-अभिलेखों में जालसाजी का खुलासा: सेवानिवृत्त लेखपाल गिरफ़्तार, ज़मीन को ‘बंजर’ बताकर धोखाधड़ी

Kapilvastupost

लोटन/सिद्धार्थनगर। भूमि संबंधी धोखाधड़ी और जालसाजी के एक गंभीर मामले में लोटन पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी, सेवानिवृत्त (पूर्व) लेखपाल काशी प्रसाद वरुण को गिरफ़्तार कर लिया है।

आरोपी पर धोखाधड़ी (धारा 420), मूल्यवान दस्तावेजों की जालसाजी (धारा 467, 468), और जाली दस्तावेज़ को असली के रूप में उपयोग करने (धारा 471) जैसी गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

​वादी अखिलेश कुमार यादव ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि गाँव खबरा बुजुर्ग के गाटा संख्या 93ग (क्षेत्रफल 0.375 हेक्टेयर) पर अनियमितताएं की गई हैं।

मूल धोखाधड़ी: तत्कालीन लेखपाल काशी प्रसाद वरुण ने वर्ष 1410 फसली में इस गाटा संख्या को सम्भोजित पुत्र रामनरायन के नाम पर ‘फूस का मकान’ अंकित कराकर तहसील अभिलेखागार में दर्ज कराया था।

दस्तावेज़ों में विरोधाभास: प्राथमिक अधिकारिक खसरा की नकल में यही गाटा संख्या ‘पूर्णतः बंजर’ (बिना किसी निर्माण) अंकित है और इस पर किसी भी किसान का नाम दर्ज नहीं है।

​यह दोनों रिकॉर्ड परस्पर विरोधी हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि यह जालसाजी और मिलीभगत से किया गया अपराध है।

गिरफ्तारी और कार्रवाई

​इस संगीन अपराध में मुख्य अभियुक्त काशी प्रसाद वरुण को पुलिस टीम ने शनिवार को दोपहर 12:50 बजे अल-हबीब चिकित्सालय, लोटनडीह के पास से गिरफ़्तार किया।

​पुलिस के अनुसार, इस मामले में नामित एक अन्य अभियुक्त सभा जीत पुत्र रामनरायन निवासी ग्राम खखरा बुजुर्ग को पुलिस पहले ही गिरफ़्तार कर जेल भेज चुकी है।

​यह गिरफ्तारी भूमि अभिलेखों में हेराफेरी करने वाले तत्वों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।