​सूचना के अधिकार का उल्लंघन: सचिव पर ₹25,000 का जुर्माना 

नियमतुल्लाह खान

सिद्धार्थनगर: सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से बनाए गए सूचना का अधिकार (RTI) कानून की अवहेलना करने पर एक ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) को भारी कीमत चुकानी पड़ी है। राज्य सूचना आयोग ने समय पर सूचना न देने और आयोग के आदेशों की लगातार उपेक्षा करने के लिए सचिव मोतीलाल अंकुश पर ₹25,000 का अर्थदंड लगाया है, जिसे उनके वेतन से काटा जाएगा।

मामला क्या था?

  • ​यह मामला विकास खंड जोगिया की ग्राम सभा नादेपार में तैनात सचिव मोतीलाल अंकुश से संबंधित है।

  • ​ग्राम सभा कटहना निवासी आरटीआई कार्यकर्ता सुधाकर मिश्र ने जन सूचना के तहत सूचना मांगी थी, लेकिन जन सूचना अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों द्वारा सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।

  • ​मामला राज्य सूचना आयोग में पहुंचा, जहाँ यह कई वर्षों तक लंबित रहा।

  • ​इस दौरान, जन सूचना अधिकारी/सचिव मोतीलाल अंकुश न तो आयोग के समक्ष उपस्थित हुए और न ही मांगी गई सूचना प्रदान की।

राज्य सूचना आयोग का कड़ा रुख

​राज्य सूचना आयुक्त नदीम अहमद ने सचिव मोतीलाल अंकुश के इस कृत्य को सूचना न देने का स्पष्ट उल्लंघन और आयोग के आदेश की अवहेलना माना।

​आयोग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए सचिव मोतीलाल अंकुश पर ₹25,000 का अर्थदंड अधिरोपित करने का आदेश दिया।

जुर्माने की वसूली के निर्देश

​इस आदेश के संबंध में, जिला विकास अधिकारी, सिद्धार्थनगर ने खंड विकास अधिकारी को पत्र जारी कर निर्देशित किया है। पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि आयोग के आदेश का पालन करते हुए सचिव मोतीलाल अंकुश के दिसंबर माह के वेतन से जुर्माने की राशि काटकर राज्य सूचना आयोग में जमा की जाए।

​यह निर्णय उन जन सूचना अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो आरटीआई कानून को गंभीरता से नहीं लेते और जानबूझकर सूचना उपलब्ध कराने में लापरवाही बरतते हैं, जिससे वर्षों तक अपीलार्थी को न्याय के लिए भटकना पड़ता है।