📅 Published on: November 30, 2025
नियमतुल्लाह खान
सिद्धार्थनगर। जोगिया विकास खंड क्षेत्र के बकरहुआँ गाँव में नलकूप विभाग द्वारा खेतों की सिंचाई के लिए बनाया गया नलकूप संख्या 142 एन जी बीते सात-आठ साल से बदहाली का शिकार है। यह नलकूप इस क्षेत्र के सैकड़ों किसानों की फसलों को पानी देने का मुख्य स्रोत था, लेकिन अब यह मात्र ‘हाथी का दांत’ बनकर रह गया है, जिसका किसानों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।
किसानों की आपबीती: पाइप लगाकर करते हैं सिंचाई
स्थानीय किसानों ने अपनी समस्या बताते हुए कहा कि नलकूप के खराब होने के कारण उन्हें खेतों की सिंचाई के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती है। किसान मजबूरी में बड़ी मुश्किल से निजी पाइप लगाकर यहाँ से सिंचाई करते हैं, जिससे उनकी लागत और मेहनत दोनों बढ़ गई है। किसान नरसिंह पांडे ने बताया कि वह लगभग सात-आठ साल से यह परेशानी झेल रहे हैं।
जाँच हुई, पर स्थिति जस की तस
किसानों के अनुसार, इस नलकूप की बदहाली को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें की गईं। हाल ही में, बाहर से अधिकारी भी जाँच के लिए गाँव आए थे और मुआयना कर के चले गए, लेकिन नलकूप की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
सूत्रों के मुताबिक, इस नलकूप की मरम्मत के नाम पर विभाग में पैसे भी आए थे, लेकिन मौके पर नलकूप का जो हाल है, वह सरकारी दावों और ज़मीनी हकीकत के बड़े फर्क को दर्शाता है। किसानों ने सवाल उठाया है कि मरम्मत के नाम पर आया पैसा आखिर कहाँ खर्च हुआ?
जिम्मेदार अधिकारी ने साधी चुप्पी
इस गंभीर मुद्दे को लेकर जब सिंचाई विभाग के जिम्मेदार अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने मीडिया के सामने कोई भी बयान देने से साफ मना कर दिया। अधिकारियों की यह चुप्पी पूरे मामले को और भी संदेह के घेरे में लाती है, जहाँ एक ओर सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर सिंचाई जैसी मूलभूत सुविधा की ऐसी बदहाल स्थिति व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करती है।
किसान अब प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं कि इस नलकूप को जल्द से जल्द दुरुस्त कराया जाए ताकि उनकी फसलें सूखे से बच सकें और उनकी सिंचाई समस्या का समाधान हो सके।