📅 Published on: December 26, 2025
जिले में किसी भी सूरत में बिना पंजीकरण के निजी अस्पताल या क्लीनिक संचालित नहीं होने दिए जाएंगे। जो लोग नियमों का उल्लंघन कर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं, उनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी-डॉ. एम.एम. त्रिपाठी ( नोडल ऑफिसर निजी हॉस्पिटल )
Kapilvastupost
सिद्धार्थनगर (इटवा): जिले में अवैध रूप से संचालित निजी अस्पतालों और क्लीनिकों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। गुरुवार को इटवा ब्लॉक क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ताबड़तोड़ छापेमारी की, जिससे क्षेत्र के झोलाछाप और अवैध अस्पताल संचालकों में हड़कंप मच गया।
बिना डिग्री और पंजीकरण के चल रहा था डेंटल सेंटर, किया गया सील
छापेमारी के दौरान टीम टेकुईंया चौराहे पर स्थित ‘मॉडल डेंटल सेंटर’ पहुंची। यहाँ एक युवक मरीजों का इलाज करते (दांत निकालना, आरसीटी, नए दांत लगाना आदि) पाया गया। जब नोडल अधिकारी ने उससे क्लीनिक के पंजीकरण और डिग्री से संबंधित दस्तावेज मांगे, तो वह कोई भी कागजात पेश नहीं कर सका।
युवक ने एक चिकित्सक का नाम लेकर बचाव की कोशिश की, लेकिन जब नोडल अधिकारी डॉ. एम.एम. त्रिपाठी ने उक्त चिकित्सक से फोन पर बात की, तो उन्होंने स्पष्ट मना कर दिया कि उनका इस सेंटर से कोई लेना-देना नहीं है।
अवैध संचालन की पुष्टि होने पर टीम ने तत्काल डेंटल सेंटर को सील कर दिया।
टीम को देखते ही अस्पताल संचालक शटर गिराकर भागे
स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता देख इटवा कस्बे के अस्पताल संचालकों में डर का माहौल दिखा।
लाइफ केयर हॉस्पिटल: जब टीम यहाँ पहुंची तो संचालक पहले ही ताला बंद कर फरार हो चुका था। अस्पताल के खिलाफ बिना पंजीकरण संचालन की शिकायत थी।
लखनऊ पाली क्लीनिक: यहाँ भी टीम के पहुँचते ही संचालक दुकान बंद कर भाग निकला।
इन दोनों प्रतिष्ठानों के गेट पर टीम ने नोटिस चस्पा कर संचालकों को तलब किया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि बिना पंजीकरण दोबारा संचालन पाया गया, तो सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी।
पैथोलॉजी संचालक को सख्त हिदायत: ‘बिना पंजीकरण नहीं खुलेगा शटर’
टेकुईंया चौराहे पर ही संचालित शिवा पैथोलॉजी की जांच के दौरान संचालक ने पंजीकरण के लिए किए गए आवेदन के दस्तावेज दिखाए। इस पर नोडल अधिकारी ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि केवल आवेदन करना पर्याप्त नहीं है। जब तक विभाग से आधिकारिक पंजीकरण प्रमाण पत्र नहीं मिल जाता, तब तक पैथोलॉजी का संचालन पूरी तरह बंद रखा जाए।
इस दौरान जांच टीम में डॉ. एम.एम. त्रिपाठी (नोडल अधिकारी) ,बिंदेश कुमार (नायब तहसीलदार),महेंद्र कुमार (पटल सहायक) उपस्थित रहे।
बताते चलें कि इन तमाम दावों और प्रशासनिक जाल के बावजूद शोहरतगढ़ और शोहरतगढ़ से सटे पकड़ी चौराहे पर बिना पंजीकरण बिना रजिस्टर्ड और बिना योग्य चिकित्सक के धड़ल्ले से अस्पताल संचालित है जिस पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। चर्चा है कि शोहरतगढ़ वाले अस्पताल में 01 दिसंबर 2025 को ऑपरेशन किया गया और प्रसूता की हालत बिगड़ गई अस्पताल संचालक द्वारा प्रसूता को इलाज के लिए संचालक द्वारा अपने निजी वाहन से गोरखपुर ले जाया गया और कुछ दिनों बाद ही मरीज की मौत हो गई।