भवांरी ग्राम पंचायत में विकास के नाम पर ‘बंदरबांट’, कागजों पर चमकी नाली-सड़क, धरातल पर भ्रष्टाचार का बोलबाला

नियमतुल्लाह खान 

सिद्धार्थ नगर (बांसी): जनपद के बांसी विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत भवांरी इन दिनों विकास कार्यों में हुई घोर अनियमितता और सरकारी धन के दुरुपयोग को लेकर चर्चाओं के केंद्र में है। राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त के लाखों रुपये के बजट को स्टीमेट के विरुद्ध खर्च करने और बिना कार्य कराए भुगतान लेने के गंभीर आरोप ग्राम पंचायत सचिव और ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारियों पर लग रहे हैं।

कागजों में विकास, धरातल पर विनाश

​ग्रामीणों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भवांरी में नाली निर्माण, नाली मरम्मत, इंटरलॉकिंग सड़क, हैंडपंप रीबोर, पंचायत भवन का रख-रखाव, कूड़ा घर, ओपन जिम, स्ट्रीट लाइट और डस्टबिन जैसे कार्यों में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई है। कई कार्य ऐसे हैं जो केवल सरकारी अभिलेखों में पूर्ण दिखा दिए गए हैं, जबकि धरातल पर उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय है या वे अस्तित्व में ही नहीं हैं।

कमीशनखोरी का ‘नेक्सस’: जांच पर भारी ‘लेन-देन’

​बांसी ब्लॉक कार्यालय में वर्षों से जमे कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

भ्रष्ट गठजोड़: ग्राम पंचायत सचिव और ब्लॉक के कतिपय जिम्मेदारों के बीच कमीशन का खेल इस कदर हावी है कि शिकायतों का कोई असर नहीं होता।

क्लीन चिट का खेल: जब भी किसी कार्य की शिकायत जिले स्तर पर होती है, तो ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारी जांच के नाम पर मौका मुआयना करने के बजाय सचिव के पक्ष में ‘झूठी रिपोर्ट’ लगाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं।​

स्थानांतरण का अभाव: चर्चा है कि ब्लॉक में दो कर्मचारी ऐसे भी हैं जो कई वर्षों से ‘कुंडली मारकर’ बैठे हैं और विकास कार्यों के बजट में अपना हिस्सा तय कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।

कार्य का विवरण

अनियमितता का प्रकार

नाली व इंटरलॉकिंग

मानक विहीन सामग्री का प्रयोग, स्टीमेट के विपरीत निर्माण।

पंचायत भवन व जिम

सौंदर्यीकरण के नाम पर सरकारी धन का भारी भुगतान।

स्ट्रीट लाइट व डस्टबिन

घटिया गुणवत्ता और संख्या में हेराफेरी के आरोप।

हैंडपंप मरम्मत

बिना

जिम्मेदारों की चुप्पी और जनता में आक्रोश

​विकास खंड बांसी के अंतर्गत भवांरी ग्राम पंचायत का यह मामला जिले के आला अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। भ्रष्टाचार की इस परत-दर-परत खुलती कहानी ने सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं। अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर भ्रष्टाचार की यह गंगा इसी तरह बहती रहेगी।