📅 Published on: January 18, 2026
हल्लौर में 28 सफर का निकाला जुलूस
सैयद असगर जमील
डुमरियागंज।
तहसील क्षेत्र के ग्राम हल्लौर में रविवार अरबी माह के 28 रजब को हजरत इमाम हुसैन अ.स.के मदीना से कर्बला के सफर की याद में ऐतिहासिक जुलूस-ए-अमारी पूरी अकीदत और एहतराम के साथ संपन्न हुआ।
सफर-ए-इमाम हुसैन के शीर्षक तले आयोजित इस कार्यक्रम में न केवल स्थानीय लोग, बल्कि जमोतीया, बेवा ,उतरौला,हटवा, और पिपरा जैसे आसपास के दर्जनों गाँवों से आए हजारों जायरीनों ने शिरकत की।
सफर-ए-कर्बला का मंजर
कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर की नमाज के बाद इमामबाड़ा कनीज रबाब में मजलिस से हुई। शाहिद आलम व हमनवा ने दर्दनाक मरसिया पेश कर माहौल को गमगीन कर दिया। इसके बाद जाकिर-ए-अहलेबैत जमाल हैदर करबलाई ने मजलिस को संबोधित किया।
उन्होंने इमाम हुसैन अ.स. द्वारा मदीना छोड़ने के ऐतिहासिक और भावुक क्षणों का जिक्र करते हुए बताया कि इमाम का यह सफर मानवता की रक्षा और हक की जीत के लिए था।
मजलिस के उपरांत अंजुमन फ़रोग़-ए-अज़ा के तत्वावधान में इमामबाड़ा कनीज रबाब से ‘जुलूस-ए-अमारी’ बरामद हुआ। जुलूस में शामिल अमारी की जियारत के लिए अकीदतमन्दों में भारी उत्साह देखा गया। लोग ‘या हुसैन’ की सदाओं के साथ इमाम को पुरसा पेश कर रहे थे।
जुलूस अपने पारंपरिक मार्गों से होता हुआ दरगाह चौक स्थित इमामबाड़ा वक़्फ़ शाहआलमगीर सानी पहुँचा, जहाँ जाकिर अजीम हैदर ने मजलिस पढ़ी।जिसके बाद अकीदतमंदों ने सीना-जनी और नौहाख्वानी कर मातम किया।वहीं बाहर से आने वाले जायरीनों के लिए जगह-जगह लंगर का विशेष प्रबंध किया गया था।
जुलूस हल्लौर के विभिन्न इमामबारगाहों से होता हुआ देर शाम स्थानीय कर्बला पहुँचकर संपन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन भी मुस्तैद रहा। ‘जुलूस-ए-अमारी’ ने एक बार फिर हल्लौर की अहलेबैत के प्रति अटूट प्रेम की मिसाल पेश की।
इस दौरान ज़ुहैर ,रिज़्वी, शीबू, वज़ीर हैदर,जानशीन,हैदर अब्बास,मुज़म्मिल,वासन रिज़्वी, गुलशन,आयात रिज़्वी, आफताब बाबा आदि उपस्थित रहे।