भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा विकास: रोईनिहवा ग्राम पंचायत में ‘ठेकेदारी प्रथा’ से सरकारी धन का बंदरबांट

गुरु जी की कलम से
बढ़नी (सिद्धार्थनगर): सरकार द्वारा पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण विकास के लिए भेजे जा रहे बजट पर भ्रष्टाचार की दीमक लग गई है। विकास खंड बढ़नी के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत घोरही उर्फ रोईनिहवा में विकास कार्यों के नाम पर बड़े गोलमाल का मामला सामने आया है। आरोप है कि ग्राम प्रधान, सचिव, जेई और ठेकेदारों के आपसी गठजोड़ ने मिलकर सरकारी खजाने को जमकर चूना लगाया है।

गठजोड़ का खेल: निजी खातों में जा रहा सरकारी पैसा
सूत्रों और स्थानीय ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में गांव में जो भी विकास कार्य हुए हैं, उनमें पारदर्शिता को ताक पर रख दिया गया। मनरेगा, पंचायत निधि और अन्य योजनाओं के तहत होने वाले कार्यों में तकनीकी सहायक (जेई) द्वारा बिना सही भौतिक सत्यापन के एमबी (Measurement Book) कर दी गई, जिसके आधार पर ठेकेदारों और कुछ खास व्यक्तियों के निजी खातों व फर्मों के नाम पर भुगतान कर दिया गया।
इन कार्यों में हुई भारी अनियमितता
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत भवन में लाइब्रेरी निर्माण, इंटरलॉकिंग, नाली-खड़ंजा, स्कूल मरम्मत और मिट्टी के कार्यों में वास्तविक खर्च से कहीं ज्यादा भुगतान दिखाया गया है। भ्रष्टाचार की सूची यहीं खत्म नहीं होती; दवा छिड़काव, साफ-सफाई, एमडीएम शेड और नाली के ढक्कन जैसे छोटे कार्यों के नाम पर भी कागजी खानापूर्ति कर भारी बंदरबांट की गई है।
जांच की मांग पर अड़े ग्रामीण
गांव में व्याप्त इस भ्रष्टाचार को लेकर अब स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि रोईनिहवा पंचायत में हुए सभी निर्माण कार्यों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई, तो प्रधान, सचिव और जेई की मिलीभगत से हुए करोड़ों के घोटाले की परतें खुल सकती हैं।