सिद्धार्थनगर: कोर्ट से दोषमुक्त होने के बाद युवक की हुंकार, फर्जी केस में फंसाने वाले पुलिसकर्मियों और SSB जवानों पर कार्रवाई की मांग

बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय  गडरखा गांव की जनता भी बहुत भोली है ऐसे लड़ाने वाले लोगों को बीस साल में सबक नहीं सिखा पाई ।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गांव का प्रभावशाली व्यक्ति लोगों को आपस में लड़ाकर फर्जी मुकदमों में लोगों को फंसाकर अपनी कुर्सी बचा रहा है। सिर्फ एक आदमी पूरे गांव को नचनिया बना दिया है।

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सिद्धार्थनगर। जनपद के ढेबरुआ थाना क्षेत्र के अंतर्गत गड़रखा गांव निवासी जावेद अली ने पुलिस अधीक्षक (SP) को प्रार्थना पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। जावेद अली का आरोप है कि उन्हें फर्जी तरीके से चरस की तस्करी के मामले में फंसाया गया था, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को गहरा आघात लगा है। अब न्यायालय द्वारा दोषमुक्त किए जाने के बाद, उन्होंने दोषी पुलिसकर्मियों और एसएसबी (SSB) जवानों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
घटना का घटनाक्रम: जबरन उठाकर फंसाने का आरोप
प्रार्थना पत्र के अनुसार, घटना 31 मई 2025 की है। जावेद अली शाम करीब सात बजे अपनी कार से जा रहे थे, तभी चिल्हिया थाना के पीछे कबाड़ की दुकान के पास मोहाना थाना के चार सिपाहियों ने बिना नंबर प्लेट वाले वाहन से उन्हें ओवरटेक कर रोक लिया। आरोप है कि उन्हें और उनके साथी रामकुमार को जबरन ककरहवा चौकी ले जाया गया और बाद में एसएसबी कैंप में रखा गया।
साक्ष्यों से छेड़छाड़ और मानसिक प्रताड़ना
पीड़ित का कहना है कि उनके पास कोई भी संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई थी, इसके बावजूद उन्हें चरस तस्करी के झूठे केस में जेल भेज दिया गया। जावेद ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके मोबाइल से लोकेशन डेटा डिलीट कर दिया था ताकि उनकी बेगुनाही का सबूत मिटाया जा सके।
न्यायालय ने माना निर्दोष
लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद, न्यायालय ने जावेद अली द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर उन्हें दोषमुक्त करार दिया है। जेल से बाहर आने के बाद जावेद अली ने अब उन अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है जिन्होंने उनके भविष्य और सम्मान के साथ खिलवाड़ किया।