गांव की सरकार और प्रदेश सरकार के बीच ठनी: “जब तक चुनाव नहीं, तब तक हम ही प्रधान” – डॉ. पवन मिश्रा

सरकार और अधिकारी हमारे अधिकारों से वंचित नहीं रख सकते संगठन आर पार की लड़ाई लड़ने के लिए संगठित हों। ताकिब रिज़वी प्रदेश उपाध्यक्ष

निजाम अंसारी 
सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने की आहट के साथ ही ‘गांव की सरकार’ और ‘प्रदेश की सरकार’ के बीच रार खींच गई है। जनपद के राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रधानों ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हुंकार भरी। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि ग्राम प्रधानों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित न किया जाए।
प्रशासक की नियुक्ति पर विवाद: भ्रष्टाचार की आशंका
बैठक को संबोधित करते हुए प्रधान संघ के **जिलाध्यक्ष डॉ. पवन मिश्रा** ने प्रधानों में जोश भरते हुए कहा, “हमने अपने खून-पसीने से गांवों को सींचा है। जब तक अगले चुनाव नहीं हो जाते, तब तक प्रधान खुद को ही प्रधान समझें।” उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी एक सोची-समझी साजिश के तहत ग्राम प्रधानों की जगह कर्मचारियों को प्रशासक बनाना चाहते हैं।
डॉ. मिश्रा ने कहा, “यदि अधिकारियों या कर्मचारियों को प्रशासक बनाया गया, तो ग्राम विकास के पैसे का बंदरबांट (भ्रष्टाचार) होगा। अगर सरकार ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त करती है, तो इससे सरकार का कोई नुकसान नहीं होगा और गांव का विकास सुचारू रूप से चलता रहेगा।”
प्रमुख मांगें और मुख्यमंत्री को पत्र
प्रदेश उपाध्यक्ष **ताकिब रिज़वी** की उपस्थिति में संगठन ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक 5-सूत्रीय मांग पत्र जारी किया है। मांग पत्र की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
1. **कार्यकाल विस्तार:** 26 मई 2026 के बाद यदि चुनाव नहीं होते हैं, तो वर्तमान प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जाए या उन्हें ही प्रशासक नियुक्त किया जाए।
2. **बकाया भुगतान:** मनरेगा और ग्राम निधि का लंबित भुगतान तत्काल किया जाए।
3. **अधिकारियों का व्यवहार:** कार्यकाल समाप्ति के डर से अधिकारी प्रधानों के साथ अभद्र व्यवहार कर रहे हैं, जिस पर रोक लगे।
4. **ठेकेदारी प्रथा का विरोध:** ग्राम पंचायतों में बढ़ती ठेकेदारी प्रथा को तत्काल बंद किया जाए।
5. **शोषण से मुक्ति:** ग्राम पंचायतों का प्रशासनिक शोषण बंद हो।
1136 ग्राम प्रधानों की एकजुटता
जनपद के 14 ब्लॉकों के **1136 ग्राम प्रधानों** का प्रतिनिधित्व करते हुए संगठन ने कहा कि ग्राम विकास के खातों में पैसा रोके रखना विकास विरोधी कदम है। बैठक के दौरान सुनील सिंह, दिलीप पांडे, अजय प्रताप यादव ,राधेश्याम शर्मा, नीतीश तिवारी, रिंकू चौधरी, अलीमुल्लाह खान, मुस्तफा खान, साहिल खान, अशोक अग्रहरि, वीरेंद्र मौर्य, महेंद्र निषाद और गुलाम रसूल सहित भारी संख्या में प्रधान उपस्थित रहे।