📅 Published on: May 11, 2026
मनोज भगवान
सीिद्धार्थ नगर – उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ की जनपदीय इकाई ने सोमवार को पुरानी पेंशन और अंतर्जनपदीय स्थानांतरण जैसी ज्वलंत समस्याओं को लेकर हुंकार भरी। जिलाध्यक्ष सुषमा सिंह की अगुवाई में भारी संख्या में शिक्षिकाओं ने बीएसए ग्राउंड में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और इसके पश्चात मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रतिनिधि को सौंपा।
11 वर्षों का वनवास खत्म करने की माँग
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष सुषमा सिंह ने कहा कि विगत 11 वर्षों से आकांक्षी जनपद की ‘गलत’ नीतियों के कारण शिक्षिकाओं का उनके गृह जनपद में स्थानांतरण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा:
”नीति आयोग और राज्य सरकार सर्वे कराकर देख लें कि अपने परिवार से दूर रहकर भी शिक्षिकाओं ने जिले को आकांक्षी श्रेणी से बाहर निकाला है। अब उन्हें उनके घर भेजने का समय आ गया है, ताकि वे अपने बुजुर्ग माता-पिता और बच्चों की देखभाल कर सकें।”
मानसिक अस्थिरता और दोहरी जिम्मेदारी का मुद्दा
शिक्षिका आरती शुक्ला और अंकिता सिंह ने कहा कि गैर-जनपद में तैनाती के कारण शिक्षिकाएं ‘एकल अभिभावक’ की भूमिका निभाने को मजबूर हैं, जिससे उनका मानसिक स्वास्थ्य और कार्यक्षमता दोनों प्रभावित हो रहे हैं। जिला महामंत्री रश्मि जायसवाल ने शासन की पुरानी नीतियों की याद दिलाते हुए कहा कि दो वर्ष के भीतर स्थानांतरण का वादा अभी भी अधूरा है।
प्रमुख माँगें और सुधार के सुझाव
जिला कोषाध्यक्ष शशि वंदना दुबे ने भारांक सिस्टम की खामियों को उजागर करते हुए वरिष्ठता आधारित नियमावली बनाने की माँग की। संघ की अन्य प्रमुख माँगें निम्नलिखित रहीं:
आकांक्षी जनपदों को नई भर्तियों से संतृप्त किया जाए।
10-15 वर्ष की सेवा दे चुके शिक्षकों को तत्काल गृह जनपद भेजा जाए।
स्थानांतरण प्रक्रिया को दोषमुक्त और प्रतिवर्ष लागू किया जाए।
इनकी रही उपस्थिति
धरने को रिचा अग्रवाल, निधि त्रिपाठी, रंजना निरंजन, अनिता आर्या और सुषमा मौर्या ने भी संबोधित किया। इस दौरान बीनू शर्मा, श्रेया तिवारी, ज्योतिकांत वर्मा, रश्मि गौतम, ममता श्रीवास्तव, शिखा गुप्ता, कविता, प्रतिभा सिंह, साधना गुप्ता, वंदना, रेनू सिंह, शाइस्ता, ज्योति रीमा, पूजा त्रिपाठी और उपमा पांडे समेत भारी संख्या में शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।