सरकारी सिस्टम शर्मसार: बढ़नी में ‘पुत्र मोह’ पर कार्रवाई के बजाय ‘इनाम’, नतमस्तक BDO ने सौंप दिया पेमेंट का डोंगल!

गुरु जी की कलम से 

बढ़नी (सिद्धार्थनगर)। विकास खंड बढ़नी में प्रशासनिक शुचिता और नियमों की धज्जियां उड़ाने का खेल अब खुलेआम तमाशा बन चुका है। ग्राम विकास अधिकारी (VDO) शीला पटेल के सरकारी कामकाज को उनके बेटे आदित्य पटेल द्वारा संभाले जाने के गंभीर आरोपों पर जिला प्रशासन को सख्त एक्शन लेना चाहिए था। लेकिन, जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाले सिस्टम ने ईमानदारी की धज्जियां उड़ाते हुए आरोपी बेटे की ऐसी ‘हौसला अफजाई’ की है, जिसने पूरे महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

अंदरखाने से आ रही खबर के मुताबिक, तीन दिन पहले इस अवैध ‘प्रॉक्सी कल्चर’ को रोकने के बजाय, आरोपी बेटे को एक तरह से ‘प्रमोशन’ का तोहफा दे दिया गया। एक सीनियर VDO के प्रभाव और अधिकार क्षेत्र को जानबूझकर कम किया गया और शीला पटेल (यानी उनके बेटे आदित्य पटेल) के कार्यक्षेत्र में चार नए गांवों को और बढ़ा दिया गया।

BDO की लाचारी या मिलीभगत? सरकारी खजाने की चाबी ‘बेटे’ के हाथ!

इस पूरे मामले में खंड विकास अधिकारी (BDO) की भूमिका पर सबसे गंभीर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि आदित्य पटेल की रसूख और पकड़ के आगे क्षेत्र के जिम्मेदार BDO भी पूरी तरह नतमस्तक हो चुके हैं।

हद तो तब हो गई जब सरकारी धन के लेन-देन और विकास कार्यों के भुगतान के लिए इस्तेमाल होने वाला सबसे गोपनीय ‘पेमेंट डोंगल’ भी आदित्य पटेल को सौंप दिया गया। सरकारी डोंगल और लॉगिन आईडी-पासवर्ड किसी बाहरी व्यक्ति के हाथ में होना न सिर्फ वित्तीय धोखाधड़ी को खुला आमंत्रण है, बल्कि यह सीधे तौर पर सरकारी गोपनीयता अधिनियम का उल्लंघन है।

बड़ा सवाल: एक संविदा या बाहरी व्यक्ति के हाथों में सरकारी खजाने का डोंगल देखकर भी ब्लॉक के आला अधिकारी आंखें मूंदे क्यों बैठे हैं? क्या इस बंदरबांट में ऊपर तक हिस्सा जा रहा है?

अपराधियों की ‘आरती उतारने’ जैसा है यह प्रशासनिक फैसला

प्रशासन द्वारा अपनी गलती सुधारने और आरोपी पर कार्रवाई करने के बजाय उसका कार्यक्षेत्र बढ़ाना, जनता के साथ भद्दा मजाक है। यह कार्रवाई कुछ वैसी ही है, जैसे समाज में किसी गंभीर अपराधी या सरकार समर्थित अपराधियों को सजा देने के बजाय उनकी आरती उतारी जाए और उन्हें माला-फूल पहनाकर सम्मानित किया जाए। सीनियर अधिकारियों के पर कतरकर एक ‘प्रॉक्सी’ को बढ़ावा देना यह साफ करता है कि बढ़नी ब्लॉक में नियम-कानून नहीं, बल्कि सांठगांठ की सरकार चल रही है।

अब देखना यह होगा कि इस महा-लापरवाही और वित्तीय जोखिम पर सिद्धार्थनगर का जिला प्रशासन और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) क्या संज्ञान लेते हैं, या फिर BDO की तरह पूरा जिला तंत्र इस भ्रष्टाचार के आगे सरेंडर कर देगा।

सरकारी सिस्टम में ‘पुत्र मोह’: बढ़नी में महिला VDO की जगह बेटा चला रहा ‘सरकार’, जिम्मेदार मौन