📅 Published on: May 28, 2026
Kapilvastupost
**सिद्धार्थनगर (उत्तर प्रदेश):** जिले के विकास खंड मिठवल के ग्राम पाली में उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब कब्जा परिवर्तन करने पहुंची चकबंदी विभाग की टीम को ग्रामीणों के उग्र विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों के कड़े रुख को देखते हुए चकबंदी टीम को बिना कोई कार्रवाई किए ही बैरंग वापस लौटना पड़ा। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक उन्हें रेलवे परियोजना का मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक वे किसी भी कीमत पर कब्जा परिवर्तन नहीं होने देंगे।
**क्या है पूरा मामला?**
ग्रामीणों के अनुसार, गांव के दक्षिणी सीवान से **बहराइच-खलीलाबाद रेलवे लाइन** परियोजना प्रस्तावित है। इस रेलवे लाइन के निर्माण से गांव के कई किसानों की जमीनें प्रभावित हो रही हैं। किसानों को डर है कि यदि इस मोड़ पर चकबंदी विभाग द्वारा कब्जा परिवर्तन (जमीन की अदला-बदली) कर दिया गया, तो कागजी उलझनों के कारण कई मूल किसान अपने उचित मुआवजे से वंचित हो सकते हैं।
**ग्रामीणों का तर्क:** “पहले रेलवे विभाग हमारी जमीनों का पूरा मुआवजा दे, उसके बाद ही चकबंदी विभाग कब्जा परिवर्तन की कोई कार्रवाई करे। बिना मुआवजे के हम अपनी जमीन का नक्शा बदलने नहीं देंगे।”
**अधिकारियों की समझाइश रही बेअसर**
कब्जा परिवर्तन कराने की जिम्मेदारी लेकर पहुंचे **एसीओ सुनील कुमार गुप्ता** ने ग्रामीणों को समझाने और शांत कराने का काफी प्रयास किया। उन्होंने कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं का हवाला दिया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे। ग्रामीणों के भारी विरोध और तीखे तेवरों को देखते हुए चकबंदी लेखपाल बब्बन सिंह और कानूनगो को अपनी कार्रवाई बीच में ही रोककर वापस जाने पर मजबूर होना पड़ा।
**जिलाधिकारी को सौंपा पत्र, अनशन की चेतावनी**
इस घटना के बाद ग्रामीणों ने एकजुट होकर जिलाधिकारी (DM) को एक प्रार्थना पत्र भेजने का निर्णय लिया है। किसानों ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि मुआवजा मिलने से पहले चकबंदी विभाग ने जबरन कब्जा परिवर्तन करने की कोशिश की, तो सभी किसान बड़े पैमाने पर आंदोलन और आमरण अनशन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि ऐसी स्थिति बनती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
### **बाइट (V/O Line-Up):**
* **बाइट 1:** सुनील कुमार गुप्ता (एसीओ, चकबंदी) – *मामले पर प्रशासनिक पक्ष और कार्रवाई रुकने की वजह।*
* **बाइट 2, 3, 4:** गांव के प्रभावित ग्रामीण – *मुआवजे की मांग और जमीन छिनने के डर पर अपनी बात रखते हुए।*