📅 Published on: June 9, 2026
बिशनपुर खुर्द गांव की घटना से शर्मसार हुआ सबसे पवित्र रिश्ता; इलाके में पसरा मातम
निजाम अंसारी
इटवा /सिद्धार्थ नगर : उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के बिशनपुर खुर्द गांव से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने मां-बेटे के सबसे पवित्र रिश्ते को कलंकित कर दिया है। जिस मां ने बेटे को नौ महीने अपनी कोख में पाला, उंगली पकड़कर चलना सिखाया और हर मुसीबत में ढाल बनकर खड़ी रही, आज उसी बेटे पर अपनी मां की बेरहमी से जान लेने का आरोप लगा है। इस दर्दनाक घटना ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है।
बहू को पिटते देख बीच-बचाव करने आई थीं मृतका
ग्रामीणों के अनुसार, मृतका कैलाशी देवी बेहद शांत और सरल स्वभाव की महिला थीं। जब भी घर में कोई विवाद या तनाव होता, वह हमेशा उसे शांत कराने का प्रयास करती थीं। रविवार रात को भी उन्होंने ऐसा ही किया, लेकिन यही उनकी जिंदगी की आखिरी कोशिश साबित हुई।
आरोप है कि कैलाशी देवी का बेटा शराब के नशे में धुत होकर अपनी पत्नी के साथ बुरी तरह मारपीट कर रहा था। घर के भीतर मचे इस कोहराम और बहू को पिटता देख कैलाशी देवी खुद को रोक नहीं पाईं। वह अपनी बहू को बचाने और घर के झगड़े को शांत कराने के लिए बीच में आ गईं। उन्हें शायद पूरा भरोसा था कि उनका बेटा उनकी बात मानकर शांत हो जाएगा, लेकिन शराब के नशे में अंधे हो चुके बेटे ने अपनी ही मां पर हमला कर दिया।
चीख-पुकार के बीच थम गईं सांसें
विवाद के दौरान कैलाशी देवी गंभीर रूप से घायल हो गईं। घटना के बाद घर में कोहराम मच गया और चीख-पुकार शुरू हो गई। परिजन आनन-फानन में उन्हें बचाने और प्राथमिक उपचार देने की कोशिश में जुट गए, लेकिन चोट इतनी गंभीर थी कि कुछ ही देर में कैलाशी देवी की सांसें थम गईं।
जिस आंगन में कभी मां की ममतामयी आवाज गूंजती थी, वहां अब केवल मातम और सन्नाटा पसरा हुआ है। घर की महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है, मासूम बच्चों की आंखों में खौफ साफ देखा जा सकता है, और परिवार के लोग अब भी इस खौफनाक हकीकत पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं।
पुलिस जांच में जुटी, गांव में पसरी खामोशी
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। सोमवार को क्षेत्राधिकारी (CO) मयंक द्विवेदी ने पुलिस टीम के साथ घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि मां अक्सर परिवार को टूटने से बचाने के लिए सबसे आगे खड़ी होती है। कैलाशी देवी भी उसी कोशिश में लगी थीं। विडंबना देखिए कि जिस घर और परिवार को बचाने के लिए वह आगे बढ़ीं, उसी घर के कलह ने उनकी जिंदगी छीन ली। गांव में हर तरफ इसी घटना की चर्चा है और हर किसी की आंखें इस त्रासदी पर नम हैं।