📅 Published on: June 13, 2026
निजाम अंसारी
**सिद्धार्थनगर।** जनपद में खाद और उर्वरकों की बिक्री में पारदर्शिता लाने और कालाबाजारी रोकने के लिए प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी द्वारा गठित संयुक्त जांच समिति के औचक निरीक्षण में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर इटवा तहसील क्षेत्र के तीन प्रमुख उर्वरक प्रतिष्ठानों के प्राधिकार पत्र (लाइसेंस) तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए हैं।
जिला कृषि अधिकारी रविशंकर पाण्डेय ने बताया कि उप जिलाधिकारी इटवा और कृषि विभाग के विषय वस्तु विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने एग्रीजंक्शन वन स्टॉप शॉप (आनंदनगर, इटवा), एसपी ट्रेडर्स (हीरखास, इटवा) तथा जैफुल्लाह खाद भंडार (बेलवा खुनियांव) पर अचानक छापा मारा।
जांच के दौरान एसपी ट्रेडर्स की दुकान बंद पाई गई, जबकि अन्य दोनों दुकानों पर न तो रेट बोर्ड लगे थे और न ही स्टॉक से जुड़ी जरूरी सूचनाएं प्रदर्शित थीं। सबसे बड़ी गड़बड़ी यह मिली कि नियमों को ताक पर रखकर बिना पीओएस (POS) मशीन के ही खाद का वितरण किया जा रहा था। इन गंभीर कमियों को देखते हुए तीनों के लाइसेंस तुरंत सस्पेंड कर दिए गए हैं।
पीओएस मशीन और किसान का पूरा ब्यौरा अनिवार्य
कृषि विभाग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि जनपद के सभी उर्वरक विक्रेता अपनी दुकानों पर अनिवार्य रूप से **प्रतिष्ठान बोर्ड** और **रेट बोर्ड** लगाएं। इसके साथ ही, खाद खरीदने वाले हर किसान का पूरा विवरण वितरण रजिस्टर में दर्ज होना चाहिए, जिसमें निम्नलिखित जानकारियां शामिल हैं:
* किसान की पहचान संख्या / सरकारी पहचान पत्र का विवरण
* खतौनी संख्या और कुल रकबा (जमीन का ब्यौरा)
* एक्टिव मोबाइल नंबर
विभाग ने साफ किया है कि उर्वरकों का वितरण केवल और केवल **पीओएस (POS) मशीन** के माध्यम से ही मान्य होगा। बिना डिजिटल एंट्री के खाद बेचना अवैध माना जाएगा।
तय कीमतों से ज्यादा वसूला तो दर्ज होगा मुकदमा
प्रशासन ने किसानों के उत्पीड़न को रोकने के लिए चेतावनी दी है कि निर्धारित मूल्य से ₹1 भी अधिक की वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके अलावा, मुख्य खाद के साथ कम प्रचलित उत्पादों (जैसे जिंक, सल्फर आदि) को जबरन टैग करके बेचने वाले दुकानदारों पर भी कड़ा एक्शन होगा।
**विधिक चेतावनी:** निर्देशों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध **उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985** तथा **आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 की धारा 3/7** के तहत मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसके तहत जेल की सजा का भी प्रावधान है।