पर्यावरण की पोषक संस्कृति का विकास जरूरी – तहसीलदार

देवेन्द्र श्रीवास्तव 

उसका बाजार सिद्धार्थनगर। मनुष्य की भोगवादी संस्कृति ने लगातार प्राकृतिक स्रोतों का अधिकतम उपयोग करते हुए प्रकृति दोहन और पर्यावरण को दूषित करने का काम किया है।जिसके परिणाम स्वरूप रोगों का संक्रमण, पर्यावरण प्रदूषण और असमय मौसम परिवर्तन जैसी अनेक समस्याएँ उत्पन्न होरही हैं।यह समूची मानवता के लिए एक अहम् चुनौती है।जिससे निपटने का एक मात्र उपाय व्यक्तिगत के साथ-साथ सार्वजानिक स्वच्छता पर ध्यान देते हुए वर्तमान और भावी पीढ़ी में पर्यावरण की पोषक संस्कृति का
विकास है।
उपरोक्त आशय का विचार तहसील नौगढ़ के सभागार कक्ष में आयोजित एक विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए तहसीलदार देवेन्द्र मणि त्रिपाठी ने व्यक्त किया।

वह बुधवार को विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान में “पर्यावरण संरक्षण एवं ठोस अपशिष्ट पदार्थों के प्रबंधन” विषय पर आयोजित एक जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।उन्होंने कहा कि स्वच्छ वातावरण से ही स्वस्थ्य वातावरण का सृजन संभव है।जिसके लिए सबको सम्मलित प्रयास करने की जरुरत है।गौरतलब है कि गोष्ठी के दौरान नायब तहसीलदार उसका ने भी पर्यावरण को बचाने के लिए प्लास्टिक थैले का उपयोग न करने ,कचरों को खुले न फेकने और साफ सफाई अपनाने पर बल दिया ।

उन्होंने गंदगी से होने वाली संक्रामक बीमारियो के बारे में जागरूक करते हुए गीले और सूखे कचरे के उचित निस्तारण पर बल देते हुए इन्हें व्यवस्थित करने की बात कही।नायब तहसीलदार ने कचरे के न्यूनीकरण ,पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग की विधियों को अपनाने तथा जैविक और अजैविक कचरे के लिए घरो में अलग अलग व्यवस्था करने की अपील किया।कार्यक्रम के समापन सत्र में उपस्थित जनसमुदाय ने वैयक्तिक के साथ साथ सार्वजानिक स्वच्छता और स्वस्थ्य पर्यावरणीय परिवेश के निर्माण में भागीदारी सुनिश्चित कराने और अधिकाधिक वृक्षारोपण का संकल्प लिया। इस मौके पर पीएलवी राज कुमार भारती, देवेन्द्र श्रीवास्तव,सिद्धार्थ गौतम,अधिवक्ता बृजेश पांडेय,दिनेश यादव,विजय श्रीवास्तव,सूरज त्रिपाठी,आरती मिश्रा,विनोद प्रजापति,प्रीति पटेल ,अशोक गुप्ता ,शैलेश कुमार ,शिव कुमार कन्नौजिया आदि लोग मौजूद रहे।