सिद्धार्थनगर: बूंद-बूंद पानी को तरस रहा बढ़नी का भरौली गांव, 3 साल से गहराया पेयजल संकट, जिम्मेदार बेखबर

गुरु जी की कलम से
बढ़नी*सिद्धार्थनगर । विकास खंड बढ़नी के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सेवरा का राजस्व ग्राम भरौली इन दिनों भीषण पेयजल संकट से जूझ रहा है। गर्मी की शुरुआत के साथ ही गाँव में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है, लेकिन प्रशासन और जिम्मेदार विभाग इस गंभीर समस्या पर आँखें मूँदे बैठे हैं। स्थानीय निवासी राम पाठक के अनुसार, पिछले तीन वर्षों से ग्रामीण पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं, और वर्तमान में स्थिति बद से बदतर हो चुकी है।
पुराना है संकट, 2024 के बाद प्रशासन ने फेरा मुंह
गाँव में पानी का यह संकट नया नहीं है। साल 2024 में जब ग्रामीणों ने पानी की किल्लत को लेकर आवाज उठाई थी, तब तत्कालीन एसडीएम शोहरतगढ़ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर पंचायत बढ़नी को टैंकरों के माध्यम से पानी की व्यवस्था करने का कड़ा आदेश दिया था। उस समय ग्रामीणों को थोड़ी राहत जरूर मिली थी, लेकिन साल 2025 आते-आते प्रशासन की यह अस्थायी व्यवस्था पूरी तरह फेल साबित हुई। इस साल फरवरी 2026 से ही गाँव में एक बार फिर पानी का भीषण संकट खड़ा हो गया है, जिससे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पटरी से उतर गई है।
मछली पालकों की मनमानी और वाटर लेवल गिरने से बढ़ी मुसीबत
भरौली गांव में इस बार जलस्तर (वाटर लेवल) नीचे खिसकने के पीछे प्राकृतिक कारणों के साथ-साथ कुछ कृत्रिम वजहें भी सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र के मछली पालकों ने इस समस्या को और ज्यादा बढ़ा दिया है। मछली पालन के लिए बोरिंग के जरिए भारी मात्रा में पानी का दोहन किया जा रहा है, जिसके चलते पूरे गाँव का वाटर लेवल बुरी तरह प्रभावित हुआ है और आम जनता के इस्तेमाल वाले पानी के स्रोत सूख रहे हैं।
सरकारी उपेक्षा की भेंट चढ़े कुएं और तालाब
जल संरक्षण और वाटर रिचार्जिंग को लेकर सरकार के तमाम दावों की पोल इस गाँव में आकर खुल जाती है। ग्राम समाज के गड्ढों और तालाबों की समय पर साफ-सफाई और सुंदरीकरण न होने के कारण उनकी निचली सतह पर भारी मात्रा में कूड़ा-करकट और सिल्ट जमा हो गई है। इसका नतीजा यह है कि बारिश या अन्य माध्यमों का पानी जमीन के अंदर ‘चार्ज’ नहीं हो पा रहा है, जिससे भूमिगत जल का संकट लगातार गहराता जा रहा है।
हैंडपंप और कुएं पड़े हैं शोपीस
गाँव में पानी के सरकारी इंतजामों की जमीनी हकीकत बेहद चौंकाने वाली है:
*सरकारी हैंडपंप:* भरौली गांव में कुल 5 सरकारी हैंडपंप हैं, जिनमें से 4 लंबे समय से खराब पड़े थे। काफी शिकायत के बाद हाल ही में महज 1 हैंडपंप को ठीक कराया गया है, जिस पर पूरे गाँव की निर्भरता बढ़ गई है।
*पारंपरिक कुएं:* गाँव में कुल 6 कुएं मौजूद हैं, जो कभी पानी का मुख्य स्रोत हुआ करते थे। प्रशासनिक अनदेखी के कारण आज केवल 1 कुआं ही इस्तेमाल के लायक बचा है, बाकी 5 कुओं की स्थिति बदहाल और जर्जर हो चुकी है।
ग्रामीणों की मांग: समरसेबल पंप और स्टोरेज की हो व्यवस्था
हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े संकट के बावजूद पूरे गांव में एक भी सरकारी समरसेबल पंप नहीं लगाया गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि गाँव में जल्द से जल्द ऐसी व्यवस्था (हाई-पावर समरसेबल और पानी की टंकी) सुनिश्चित की जाए, जिससे जमीन से पानी निकालकर उसे स्टोर किया जा सके और ग्रामीणों को नियमित जलापूर्ति मिल सके। 3 सालों से पानी के इस दंश को झेल रहे भरौली के ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे रहा है, देखना यह है कि जिला प्रशासन कब जागता है।

इस गंभीर जल संकट के संबंध में जब रिपोर्टर ने गांव में जाकर ग्राउंड रिपोर्टिंग करी तो लगभग ढाई हजार आबादी के सामने गहरा पेयजल संकट है ।

मामले में ग्राम प्रधान ने कहा- “समस्या के स्थायी समाधान के लिए हम पूरी तरह प्रतिबद्ध”
गाँव में गहराए इस संकट पर **ग्राम पंचायत सेवरा के प्रधान विजय कुमार पाठक** ने बेहद सकारात्मक और संवेदनशील रुख अपनाया है। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा: “राजस्व ग्राम भरौली में वाटर लेवल नीचे जाने की वजह से ग्रामीणों को हो रही पेयजल की समस्या हमारे संज्ञान में है। स्थानीय स्तर पर तात्कालिक राहत के लिए खराब हैंडपंपों को ठीक कराने का काम शुरू कर दिया गया है। मछली पालकों द्वारा पानी के अत्यधिक दोहन और तालाबों की सिल्ट सफाई को लेकर हम प्रशासन के साथ मिलकर एक ठोस कार्ययोजना बना रहे हैं। हमारा पूरा प्रयास है कि गाँव में जल्द से जल्द एक बड़ा समरसेबल पंप और स्टोरेज की व्यवस्था कराई जाए ताकि आने वाले समय में ग्रामीणों को कभी भी पानी की किल्लत का सामना न करना पड़े। जनता की सुविधा ही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
सोमवार को बीडीओ ने किया दौरा, बोले- “त्वरित और प्रभावी कार्रवाई होगी”
मामले की गंभीरता को देखते हुए **विकास खंड अधिकारी (BDO) बढ़नी** ने बीते सोमवार को स्वयं राजस्व ग्राम भरौली का स्थलीय निरीक्षण किया। गाँव की स्थिति का जायजा लेने के बाद विकास खंड अधिकारी ने आश्वस्त करते हुए कहा: “सोमवार को मैंने स्वयं भरौली गाँव का दौरा कर पेयजल की स्थिति और जलस्तर की समस्या को देखा है। ग्रामीणों को पानी की दिक्कत न हो, इसके लिए ब्लॉक स्तर से त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं। ग्राम विकास विभाग और पंचायत टीम को निर्देशित किया गया है कि वे गाँव के पारंपरिक जल स्रोतों (कुओं और तालाबों) के पुनरुद्धार और वाटर रिचार्जिंग के लिए तत्काल सफाई योजना तैयार करें। जहाँ तक समरसेबल पंप और पानी के स्टोरेज की मांग है, उसके लिए आवश्यक तकनीकी और वित्तीय मंजूरी की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा ताकि तीन वर्षों से चले आ रहे इस संकट का स्थायी अंत किया जा सके।”