📅 Published on: August 24, 2026
लोकेशन: बांसी,सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश
Kapilvastupost
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले की बांसी तहसील से एक बेहद गंभीर और व्यथित करने वाली खबर सामने आ रही है। मिठवल ब्लॉक स्थित भरथना गांव में, जहां बच्चे अपने बेहतर भविष्य की नींव रखते हैं, उसी स्कूल की जमीन पर दबंगई का साया मंडरा रहा है।
गाटा संख्या 236—जो कागजों में स्कूल के नाम सुरक्षित दर्ज है—उसकी लगभग 25 एयर जमीन पर गांव के ही ग्राम प्रधान द्वारा अवैध कब्जा किए जाने का आरोप लगा है। यह महज जमीन के टुकड़े का मामला नहीं है, बल्कि उन मासूम बच्चों के अधिकारों पर डाका है जो उस प्रांगण में खेलकर बड़े होते हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व एसडीएम, जिला विकास अधिकारी और लोकायुक्त अधिकारी तक ने जांच की। जांच में आरोप सही पाए जाने पर बांसी तहसीलदार ने कार्रवाई करते हुए 12,000 रुपये का जुर्माना ठोका और जमीन को स्कूल के लिए सुरक्षित करने के निर्देश जारी किए।
लेकिन सबसे बड़ा और दर्दनाक सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ 12 हजार का जुर्माना लगा देने से स्कूल की जमीन सचमुच कब्जा मुक्त हो पाएगी? क्या कागजी आदेशों से परे जाकर प्रशासन उन नौनिहालों को उनका हक दिला पाएगा? पीड़ित स्कूल प्रशासन और ग्रामीण आज भी लाचार नजर आ रहे हैं और प्रशासन से सिर्फ एक गुहार लगा रहे हैं कि कागजों के बजाय धरातल पर सख्त कार्रवाई की जाए।
जानें पूरा मामले
भरथना गांव के प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालय के बच्चे लंबे समय से अपनी ही जमीन पर खेलने और बैठने के अधिकार से वंचित हैं। सुरक्षित गाटा संख्या 236 की 25 एयर जमीन पर जब ग्राम प्रधान द्वारा अवैध निर्माण और कब्जा शुरू हुआ, तो ग्रामीणों और स्कूल प्रशासन ने न्याय की गुहार लगाई।
लोकायुक्त और प्रशासनिक अधिकारियों की जांच में कब्जे की पुष्टि होना यह साबित करता है कि शिकायत पूरी तरह सच्ची थी। लेकिन कार्रवाई के नाम पर महज 12,000 रुपये का जुर्माना वसूलना पीड़ितों के लिए किसी न्याय से कम नहीं लगता। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक निर्माण पूरी तरह ध्वस्त कर जमीन स्कूल के सुपुर्द नहीं की जाती, तब तक बच्चों का भविष्य अंधकार में ही रहेगा।