📅 Published on: September 20, 2026
खुटेहना ग्रामसभा में विकास कार्यों के भुगतान में अनियमितता का आरोप; शिकायतकर्ता ने उठाए सरकारी धन के इस्तेमाल पर सवाल
Kapilvastupost
बांसी/सिद्धार्थनगर। मिठवल ब्लॉक के खुटेहना गांव में ग्रामसभा के विकास कार्यों में कथित अनियमितता और फर्जी भुगतान के आरोपों को लेकर करीब पांच साल बाद न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज हुआ है। कोतवाली बांसी पुलिस ने पूर्व ग्राम प्रधान राजकुमार उर्फ पप्पू और तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव सुरेंद्र यादव के खिलाफ धारा 419, 420, 406 और 409 के तहत केस दर्ज किया है।
गांव निवासी अमित पांडेय ने ग्रामसभा में कराए गए विभिन्न विकास कार्यों के भुगतान में नियमों की अनदेखी और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए न्यायालय की शरण ली थी। शिकायत के अनुसार पंचायत भवन समेत अन्य स्थानों पर कराए गए विकास कार्यों के भुगतान में कथित तौर पर अनियमितता की गई। कुछ कार्यों में फर्जी आईडी के इस्तेमाल से भुगतान कराने तथा नाबालिग बच्चों के नाम पर भुगतान किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
पांच साल तक चलता रहा मामला
शिकायतकर्ता के अनुसार मामले को लेकर करीब पांच वर्षों तक न्यायालय में कार्रवाई चलती रही। फौजदारी निगरानी न्यायालय में वाद दाखिल किए जाने के बाद न्यायालय के आदेश पर कोतवाली बांसी पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है।
प्रभारी निरीक्षक कोतवाली बांसी महेंद्र प्रताप चतुर्वेदी के अनुसार न्यायालय के आदेश के अनुपालन में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है।
अभिलेखों और भुगतान रिकॉर्ड की होगी जांच
मुकदमे की जांच के दौरान ग्रामसभा से संबंधित अभिलेख, विकास कार्यों के दस्तावेज, भुगतान संबंधी रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जाएगी। आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
सवाल यह भी—अन्य शिकायतों पर कब होगी कार्रवाई?
खुटेहना मामले में न्यायालय के आदेश के बाद मुकदमा दर्ज होने से जहां शिकायतों की जांच का रास्ता खुला है, वहीं ग्रामीण स्तर पर विकास कार्यों और सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर उठने वाली अन्य शिकायतों पर भी कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और विकास कार्यों में कथित अनियमितता से जुड़े कई मामलों में शिकायतें सामने आने के बावजूद यदि कार्रवाई लंबित है, तो संबंधित विभागों को उन मामलों की भी निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
फिलहाल खुटेहना मामले में पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और सरकारी धन के भुगतान में वास्तव में कोई अनियमितता हुई थी या नहीं।