बढ़नी में डीजे के भीषण शोर के बीच 2 दिन के मासूम की मौत, बुद्धिजीवियों की पूर्व चेतावनियों को नजरअंदाज करने पर भड़का आक्रोश
📅 Published on: October 21, 2026
गुरु जी की कलम से
सिद्धार्थनगर। जिले के बढ़नी कस्बे में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान डीजे (DJ) के कानफोड़ू शोर और तेज कंपन के बीच दो दिन के नवजात शिशु की सांसें थम गईं। ढेबरुआ थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 9 स्थित रामलीला मैदान में घटी इस दर्दनाक घटना से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। नवजात की मौत के बाद जहां पीड़ित परिवार में कोहराम मचा हुआ है, वहीं स्थानीय नागरिकों और बुद्धिजीवियों का गुस्सा जिला प्रशासन पर फूट पड़ा है।
दरअसल, इस हादसे ने प्रशासनिक कार्यशैली पर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि कस्बे के जागरूक नागरिकों ने इस खतरे को लेकर पहले ही आलाधिकारियों को आगाह किया था।
बुद्धिजीवियों की चेतावनी और शिकायतों को प्रशासन ने किया दरकिनार
स्थानीय लोगों के अनुसार, बढ़नी कस्बे के बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों और जागरूक निवासियों ने त्योहारों के दौरान बजने वाले अनियंत्रित और अत्यधिक तेज आवाज वाले डीजे को लेकर पहले ही कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी।
गत 5 अक्टूबर को ही स्थानीय नागरिकों ने जिलाधिकारी (DM) शिवशरणप्पा जीएन और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) डॉ. अभिषेक महाजन को लिखित ज्ञापन सौंपकर कस्बे में नियम-विरुद्ध बज रहे तेज डीजे पर तत्काल रोक लगाने की गुहार लगाई थी। शिकायतकर्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि डीजे के भारी साउंड सिस्टम और कंपन से बुजुर्गों, मरीजों और छोटे बच्चों की जान को गंभीर खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
रोते-बिलखते परिजनों ने बयां किया दर्दनाक मंजर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बच्चे का जन्म 18 अक्टूबर को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) बढ़नी में हुआ था। मां सबरून्निशा ने बताया कि विसर्जन जुलूस के दौरान डीजे का शोर और कंपन बेहद तेज था।
रात करीब 11:30 बजे अचानक डीजे के भीषण शोर के बीच नवजात जोर-जोर से रोने लगा और देखते ही देखते उसकी सांसें थम गईं। परिजनों का आरोप है कि डीजे के असहनीय शोर और धमक के कारण ही बच्चे की तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई।
रात 2:15 बजे पहुंचे सीओ, कार्रवाई का दिया आश्वासन
घटना की सूचना मिलते ही रात करीब 2:15 बजे शोहरतगढ़ के क्षेत्राधिकारी (CO) मयंक द्विवेदी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने शोकाकुल परिवार से मुलाकात कर सांत्वना दी और मामले में निष्पक्ष जांच व उचित कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया।
जनता के तीखे सवाल:
शिकायतों के बावजूद ढिलाई क्यों? जब बुद्धिजीवियों ने 5 अक्टूबर को ही डीएम और एसएसपी से लिखित शिकायत की थी, तो विसर्जन के दौरान तेज आवाज में डीजे बजने पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लगाई गई?
ध्वनि प्रदूषण के नियमों की धज्जियां: क्या विसर्जन जुलूस के दौरान सुप्रीम कोर्ट और शासन द्वारा निर्धारित डेसिबल (Decibel) मानकों और गाइडलाइंस का पालन कराया जा रहा था?
जिम्मेदारी किसकी? समय रहते प्रशासनिक कदम न उठाए जाने के कारण हुई इस मासूम की मौत का जिम्मेदार कौन है?


