50 साल पुराने रास्ते पर कब्ज़े का खेल, दिन में मनरेगा मज़दूरों की फर्ज़ी हाजिरी और रात में ट्रैक्टर से एग्रो रोड का निर्माण

दिन में कागज पर मज़दूर, रात के अंधेरे में ट्रैक्टर: बांसी के आमामाफी में पोखरे के भीटे पर अवैध एग्रो रोड का निर्माण, प्रशासन बेखबर

Kapilvastupost

सिद्धार्थनगर (उत्तर प्रदेश)। जहाँ एक तरफ प्रदेश सरकार गरीब मज़दूरों को रोजगार देने के लिए प्रयासरत है और माननीय उच्च न्यायालय अवैध कब्जों को हटाने के सख्त निर्देश दे चुका है, वहीं जिले के बांसी ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत आमामाफी में इन दोनों ही आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

आमामाफी ग्राम पंचायत में पिछले 15 दिनों से पिच रोड से बगीचे तक एग्रो रोड पटाई का काम कागज़ों में मनरेगा मज़दूरों के नाम पर चल रहा है। आरोप है कि दिन के समय मज़दूरों की फर्ज़ी हाजिरी लगाई जाती है और रात के अंधेरे में कई ट्रैक्टरों को लगाकर मौजूदा रास्ते से करीब 100 फीट दूर पोखरे के भीटे पर अवैध रूप से नई एग्रो रोड का निर्माण कराया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस मौजूदा रास्ते को बदला जा रहा है, वह पिछले 50 से अधिक वर्षों से आम आवागमन के लिए इस्तेमाल हो रहा है। इसी रास्ते से ‘जल जीवन मिशन’ के तहत बनी पानी की टंकी, शमशान घाट तथा परसपुर गाँव के सैकड़ों ग्रामीणों का आवागमन जुड़ा हुआ है। इस हेरफेर से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।

अब सवाल यह उठता है कि आखिर किसकी शह और मिलीभगत से कागज़ों पर मज़दूरों का नाम चढ़ाकर रात में ट्रैक्टरों से पोखरे के भीटे पर यह अवैध निर्माण का खेल चल रहा है?

इस पूरे मामले पर जब मुख्य विकास अधिकारी (CDO) बलराम सिंह से बात की गई तो उन्होंने मामले को संज्ञान में लेते हुए निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, अब देखना यह होगा कि यह जांच महज फाइलों में सिमट कर रह जाती है या धरातल पर दोषियों पर कड़ा एक्शन दिखाई देगा।