📅 Published on: March 30, 2024
kapilvastupost
इस्लाम धर्म में रोज़े का बड़ा महत्व है इस्लाम के मानने वाले रोज़े के महीने का बेसब्री से इंतज़ार करते हैं | इस महीने में बरकतें नाजिल होती हैं मान्यताओं के अनुसार इस महीने रोज़ा नमाज़ और ज़कात या लोगों की मदद करने से उसका सत्तर गुना शवाब यानि पुण्य मिलता है |
रोज़ा रखने की सुरुवाती उम्र 9 साल बताया जाता है जब कोई भी महिला या पुरुष इस उम्र को पहूंचता है तो उसका रोज़ा रखना फ़र्ज़ है |
क़स्बा शोहरतगढ़ स्थित प्रतिष्ठित डॉक्टर अंसारी परिवार के एक नौनिहाल मो शयान अंसारी द्वारा अपना पहला रोज़ा रखा गया शयान के पहले रोज़े पर डॉक्टर अंसारी परिवार की तरफ से रोज़ा इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया जिसमें कसबे के लोगों के साथ ही क्षेत्र के तमाम जनप्रतिनिधियों ने शिरकत की और बच्चे के पहला रोज़ा रखने पर बहुर सारी दुवाओं से नवाज़ा गया |
इफ्तार के दौरान हाफिज सेराज ने रोजेदारों के बीच कहा कि अल्लाह सबको रोज़े रखने नमाज़ और तराबी पढने की हिदायत बख्से बच्चे की हौशला अफजाई करते हुवे उन्होंने कहा रोज़ा अपने आप में बेमिशाल है बहुत सारी बरकतें होती है रमजान के महीने में इफ्तार कराना बहुत शवाब का काम है इफ्तार में गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराने से लोगों में एक जुटता और सामाजिक भाई चारा बढ़ता है |
इस दौरान हाफिज सेराज , इंजिनियर अज़िज़ुर्रह्मन अंसारी, डॉ शादाब , डॉ सरफ़राज़ , इंजिनियर मो एजाज़ अंसारी , सरताज आलम ,अज़ीज़ अहमद , प्रधान संघ बलाक ज़फर आलम , सभासद वकील खान , सभासद बाबूजी ,प्रधान मो आसिम नैय्यर , प्रधान अब्दुर्रशीद , नेता अल्ताफ हुसैन , नवाब khan ,वाली khan , अनवर , ज़फर सहित सैकड़ों रोजेदार उपस्थित रहे |