सिद्धार्थ नगर – सार्जावनिक वितरण प्रणाली की नयी व्यवस्था फ़ैल यूनिट के अनुसार कार्ड धारकों राशन नहीं देते कोटेदार

उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी कहने को तो राष्ट्रवादी पार्टी है उनके एक एक बात में राष्ट्रवाद छलकता है शक्तिशाली सरकार मानी जाती है पर आम जनता को व्यवस्था देने में यह फिसड्डी साबित हो रही है यह पहली बार नहीं है  बी जे पी का यू पी में यह दूसरा शासनकाल है लेकिन आज तक कार्ड धारकों को यूनिट के अनुसार राशन नहीं दे पाई है|

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सरकार ने सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर चोरी रोकने के लिए तथा जनता को पूर्ण राशन मिलने के लिए समय- समय पर नई-नई तकनीकी निकलती रहती है। किन्तु कोटेदार सरकार से दस कदम आगे निकलकर चोरी करने में माहिर होते हैं।

ज्ञातव्य हो कि सरकार ने एक नई तकनीक निकाली है कि जब भी कोई पात्र गृहस्थी का व्यक्ति राशन लेने दुकान पर जायेगा तो उसको ई पोश और ई वीइंग मशीन को एक साथ जोड़ दिया है | मशीन से राशन तौल कर दिया जायेगा।

जब तक पूरा राशन नहीं होगा तब तक पात्र गृहस्थी व्यक्ति का अंगूठा नहीं लगेगा। जब तक उचित राशन नहीं मिलेगा उसका अंगूठा आधार कार्ड के अनुसार मिलान नहीं करेगा या राशन के अनुसार पर्ची नहीं निकलेगी। किन्तु कोटेदार बडी चालाकी से जनता से अंगूठा लगवाकर पर्ची निकालकर दे रहे हैं और राशन नहीं दे रहे हैं।

राशन देने के लिए दूसरे दिन बुलाकर उनको अपने पुराने तरीके से घटतौली करते हुए राशन वितरण करने का काम कर रहे हैं। यह एक नहीं बल्कि लगभग सभी कोटेदार कर रहे हैं। सरकार चोरी पर रोक लगाती है। किन्तु चोर और अधिकारी मिलकर सरकार से दस कदम आगे निकल जाते हैं।

क्योंकि अंगूठा लगाने वाला व्यक्ति वहीं जाता है। जो अनपढ होता है या अधिकतर महिलायें होती हैं। जिसको कोटेदार आसानी से समझाकरके या डरा धमकाकर और अपने व्यस्त होने का बहाना बनाकर बेवकूफ
बना देते हैं और इसका फायदा उठा रहे है।

सिद्धार्थनगर जिले के अधिकतर तहसीलों का यही हाल है लोगों से बात करने पर पता चला कि कोटेदार एक दिन पहले सबको पर्ची निकाल कर दे दियें। लोग तो यह देख रहे थे कि कई थैलियों में अनाज रखे थे, उन थैलियों को कांटे पर रखकर पर्चियां निकाली जा रही थी किन्तु राशन नहीं दिया जा रहा था।

राशन के लिए दूसरे दिन बुलाया गया। पर्ची निकालने के बाद राशन मिलेगा कि नहीं मिलेगा इस बात की कोई गारन्टी भी नहीं है। क्योंकि पर्ची निकालना इस बात का सबूत है कि जब तक राशन नहीं मिला है। तब तक पर्ची नहीं निकली है।

इस तरह से सरकार की आंखों में धूल झोंकते हुए जनता की हकमारी कोटेदारों के द्वारा की जा रही है। सूत्रों के अनुसार इस तरह की कार्य प्रणाली लगभग सभी ग्राम पंचायतों में चल रही है। कुछ दुकानदार ई पोश मशीन और ई वेइग मशीन पर थैलियों में अनाज रख कर पर्ची निकालकर पुनः पुराने तरीके से घटतौली करते हुए राशन वितरण कर रहे हैं।

प्रशासन इस पर ध्यान नहीं दे रहा है यह चोरियां अधिकारीयों के संरक्षण में फल फूल रही हैं क्तोंकी भारत में अधिकतर प्रचालन है कि परिवार का एक व्यक्ति कमाएगा और बाकि सब खायेंगे | इस चोरी को रोक पाना सरकार के बस की बात नहीं है घर पर बुलडोजर चलने वाले प्रशासनिक अधिकारीयों को एक छोटी सी चोरी रोकी नहीं जा रही है |

या सरकार को बदनाम करने की इस तरह की साजिश चलती रहेगी। क्या ऐसे चोरों पर सरकार कार्यवाही करेगी? सरकार की ईडी सीबीआई हर जगह काम करती है। क्या इस जगह भी ईडी सीबीआई अपने तरीके से काम करके कोटेदारों से पूर्ण रूप से राशन लोगों को वितरण कराने का काम कर सकती है?