सिद्धार्थ नगर – जनपद के लगभग 1200 ग्राम पंचायतों में बने इज्जत घरों / सामुदिक शौचालय अधिकतर बन्द

इज्जत घरों को भी नटवरलालों ने नहीं बख्शा, कार्रवाई नहीं होने से सवालिया निशान

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सिद्धार्थनगर । नौकरशाहों की उदासीनता एवं भ्रष्ट नीतियों की पोल खोलने के लिए जिले के इटवा विकास खण्ड के अधिकांशतः ग्राम सभाओं में बने शौचालय बेताब हैं लेकिन उन शौचालयों के दुख दर्द को सुनने वाला कोई भी जिम्मेदार नौकरशाह नजर नहीं आ रहा है। यही हाल जिले के सभी विकास खण्डों का है |

ऐसे में शासन के मंशा की सरेआम धज्जियां उड़ाने को  कैसे नकारा जा सकता है। मिली जानकारी के अनुसार सरकार द्वारा स्वच्छ भारत मिसन को साकार करने के उद्देश्य से प्रत्येक ग्राम सभाओं में 4 लाख 8 हजार रुपए की लागत से शौचालय निर्माण का फरमान जारी किया गया था।

इतना ही नहीं शौचालयों के रखरखाव एवं समुचित व्यवस्था हेतु प्रत्येक शौचालय के लिए 3 हजार रुपए प्रतिमाह निर्धारित किया गया है। इसके अलावा केयर टेकर को 6 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय भी निर्धारित किया गया है।

लेकिन सबसे अफसोस की बात यह है कि इतनी लागत से बने शौचालय और उन पर प्रतिमाह खर्च हो रहे धन किसी भी काम के नहीं साबित हो रहे हैं। बताते चलें की इटवा विकास खण्ड में कुल 104 ग्राम पंचायतें हैं और भनवापुर विकास खण्ड में कुल 122 ग्राम पंचायतें हैं इस तरह पूरे जिले में 1199 ग्राम पंचायतों के सामुदायिक शौचायलयों का किसी जिम्मेदार अधिकारी द्वारा निष्पक्षता से जांच व निरीक्षण किया जाए तो वाकई में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार उजागर हो ही जायेगा।

इसी क्रम में इटवा विकास खण्ड के धन्धरा ग्राम सभा के सामुदायिक शौचालय पूर्व प्रधानी से ही निर्माणधीन है वहीँ बढ़नी विकास खण्ड के लोहटी में निर्माणधीन है  ऐसे में सबसे गंभीर सवाल यह है कि शौचालयों की इस बद्तर एवं दयनीय व्यवस्था और जर्जर हालात का जिम्मेदार कौन है।

क्योंकि जिम्मेदार नौकरशाह तो सिर्फ कार्यालय में बैठकर कागजी निरीक्षण ही करना पसंद करते हैं। और उन कागजों में सारी व्यवस्थाएं चाक चौबंद मिलती हैं। लेकिन वे नौकरशाह शख्ती के साथ कभी उन शौचालयों का निरीक्षण करना और करवाना कत्तई पसंद नहीं करते हैं। जिससे भरष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है आशा है अधिकारी अपने चैम्बर से निकलकर गाँव के विकास की कहानी खुद से देखें |

प्रतीकात्मक फोटो