बच्चों में बढ़ती उम्र के साथ देर से निकल रहे दांत घबराने की बात नहीं दांतों का एक्स रे करवाने से होगा समस्या का समाधान

बच्चों के विकास में दांतों का समय पर निकलना एक महत्वपूर्ण और सामान्य प्रक्रिया है हालांकि, कुछ बच्चों में बढ़ती उम्र के साथ दांतों का देर से निकलना चिंता का विषय बन सकता है। यह स्थिति कई कारणों से हो सकती है, जिनमें पोषण की कमी, आनुवांशिक कारक और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ शामिल हैं ।

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दस से बारह वर्ष के बच्चों में समय अवधि के हिसाब से परमानेंट दांतों का न निकलना विकास न होने को लेकर डॉ अंसारी डेंटल क्लिनिक की BDS सर्जन डॉक्टर अल्शिमा हफीज बताती हैं कि आमतौर पर, बच्चों के दांत 6 महीने की उम्र से निकलना शुरू हो जाते हैं और 3 साल की उम्र तक अधिकांश बच्चों के सभी 20 दूध के दांत निकल जाते हैं।

वैसे सामान्यतः देखा जाता है कि 12 से 13 वर्ष के बीच बच्चों में 28 दांत विकसित हो जाते हैं | लेकिन जब पक्के दांतों का निकलना सामान्य समय से अधिक देर से होता है, तो यह कई कारणों का संकेत हो सकता है |

दांतों का समय से विकसित न होना आम तौर पर पोषण से भरपूर भोजन जैसे खाने में विटामिन A  कैल्शियम, विटामिन D और फॉस्फोरस जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की कमी दांतों के विकास में देरी कर सकती है। ये पोषक तत्व दांतों और हड्डियों के विकास के लिए आवश्यक हैं।

आनुवांशिक कारक: कुछ बच्चों में दांतों के देर से निकलने का कारण आनुवांशिक हो सकता है। अगर परिवार में किसी सदस्य के साथ भी ऐसा हुआ हो, तो संभावना है कि बच्चे में भी ऐसा हो सकता है। स्वास्थ्य समस्याएँ: थायरॉइड विकार, जन्मजात हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ भी दांतों के विकास में देरी कर सकती हैं।

डॉ अल्शिमा बताती हैं कि यदि बच्चा तंदरुस्त है पोषण युक्त भोजन कर रहा है फिजिकल एक्टिविटी भी है तो ऐसी स्थित में हम एक्स रे विधि से जिन बच्चों में 10 से 15 साल के बच्चों में मूंह में एक या दो दांत समय से नहीं निकल रहे हैं तो सबसे पहले बच्चों के मसूड़ों का एक्स रे करके पता लगाया जाता है कि मसूड़ों के नीचे दांत बन रहे हैं या नहीं यदि दांत मसूड़ों के नीचे बन रहे हैं तब वह कुछ समय के बाद निकल आते हैं |

बच्चों में दांतों का देर से निकलना एक सामान्य लेकिन महत्वपूर्ण चिंता का विषय हो सकता है। इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। पोषक तत्वों से भरपूर आहार, स्वच्छता और नियमित रूप से हर तीन से छ महीने पर स्वास्थ्य जांच से इस समस्या को प्रबंधित किया जा सकता है, जिससे बच्चों के समग्र विकास में मदद मिलती है।

नोट – डॉ अल्शिमा हफीज BDS DENTAL सर्जन हैं जो पूर्व में मुंबई के मशहूर जे जे हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं | डॉ अल्शिमा अंसार डेंटल क्लिनिक पर प्रत्येक दिन सुबह दस बजे से शाम सात बजे तक मरीजों का इलाज करती हैं | दांत से सम्बंधित किसी भी प्रकार की सहयता के लिए मोबाइल न० 99 18 82 52 20 पर संपर्क कर सकते हैं |