📅 Published on: April 14, 2025
निज़ाम अंसारी
चिल्हिया थाना क्षेत्र के परसिया-लौसा गांव के बीच रविवार की दोपहर वह मंजर देखा गया, जिसे किसान कभी भूल नहीं पाएंगे। खेतों में लहलहाती गेहूं की फसल, जिसमें किसान पूरे साल का सपना बोते हैं—कुछ ही पलों में राख में तब्दील हो गई। तेज हवाओं के बीच बिजली के खंभे से गिरे इंसुलेटर ने चिंगारी छोड़ी और आग ने देखते ही देखते करीब 20 बीघा गेहूं की फसल को चट कर दिया।
लौसा पावर स्टेशन से जुड़े हाईटेंशन तार की सप्लाई लाइन पर लगे खंभे से इंसुलेटर टूटकर खेत में गिरा और उसी वक्त हवा ने ऐसी करवट ली कि फसल को जलने में देर न लगी। आग की लपटें जिस तेजी से बढ़ीं, किसानों की उम्मीदें उतनी ही तेजी से राख होती चली गईं।
गांव के पलटन, सोनमती, शिवरतन, महावीर, देवनारायण उपाध्याय, सदानंद उपाध्याय, अरविंद उपाध्याय, संदीप, प्रदीप, तुंगनाथ उपाध्याय जैसे कई किसानों के खून-पसीने की कमाई कुछ ही मिनटों में धुएं में उड़ गई। इन किसानों ने पूरे साल मेहनत से खेत जोते, बीज डाले, सिंचाई की और फसल को आंखों की तरह सींचा। पर इस हादसे ने उनका सब कुछ छीन लिया।
जब खेतों में आग लगी, तो परसिया और लौसा के ग्रामीण जान की बाजी लगाकर दौड़े और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। खेतों में सिर्फ राख और अधजली बालियां रह गईं।
हल्का लेखपाल पिंटू पासवान मौके पर पहुंचे और नुकसान का आंकलन कर रिपोर्ट तहसील को भेजने की बात कही। पर किसान सवाल कर रहे हैं—”क्या सिर्फ रिपोर्ट से हमारे जले हुए अरमान वापस आ जाएंगे?”
एक किसान ने आंसू पोछते हुए कहा, हमने तो सोचा था कि इस बार बेटी की शादी में यही फसल मदद करेगी, लेकिन अब तो कुछ नहीं बचा।”
यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि उस किसान की कहानी है जो हर मौसम की मार सहकर देश का पेट भरता है, पर जब उस पर संकट आता है तो व्यवस्था अक्सर केवल रिपोर्टों तक सीमित रह जाती है।
अब जरूरत है त्वरित राहत की, न्यायसंगत मुआवजे की और फायर टैंकर की व्यवस्था करने की, ताकि अगली बार किसी किसान की मेहनत यूं राख न हो जाए।