शहीद-ए- मिल्लत कॉन्फ्रेंस का हुआ आयोजन, उलेमाओं ने दीन और दुनिया पर डाली रोशनी

आस्ताने शहीद ए मिल्लत के उर्स में लोगों ने चढ़ाई चादर और मांगी दुआए

Nizam Ansari
मोहब्बत व भाईचारे का पैगाम देता है इस्लाम, अरबाब फारूकी

सिद्धार्थनगर डुमरियागंज। स्थानीय तहसील क्षेत्र के ग्राम बसडिलिया स्थित आस्ताने शहीद ए मिल्लत में शुक्रवार की रात शहीद-ए- मिल्लत कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। जिसमें नामचीन उलेमाओं व वक्ताओं ने भाग लिया।

शहीद ए मिल्लत के उर्स में अकीदतमनदो ने चादर चढ़ाया और दुआएं भी मांगी।
शुक्रवार की रात आयोजित शहीदे आजम कॉन्फ्रेंस में मुख्य वक्ता के रूप में अपने संबोधन मेंमुरादाबाद से आए सैय्यद शबाहत हुसैन ने कहा कि हर ईमान वाला जन्नत का हकदार है इंसान अपनी बुराइयों को खत्म करें और नेकी के रास्ते को अपनाए।

आज शिक्षा के मामले में मुसलमान काफी पीछे हैं उन्हें दीनी और दुनियावी दोनों शिक्षा पर जोर देना होगा। तभी एक सफल जीवन में कामयाबी मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सबसे पहली सीढ़ी मां-बाप होते हैं अगर बचपन में मां बाप का प्यार मिला तो वह बच्चे गलत कामों की तरफ नहीं जा पाते हैं।

जब मां-बाप नेक होंगे तो बच्चे भी नेक होंगे। उन्होंने दहेज पर बोलते हुए कहा कि दहेज लेना और देना दोनों गुनाह की श्रेणी में आता है हमें इससे बचना चाहिए तभी एक अच्छे समाज का निर्माण किया जा सकता है। इस मौके पर कान्फ्रेंस को खिताब करते हुए मुफ्ती फुरकान रजा बरेली शरीफ ने कहा कि शहीदे आजम कॉन्फ्रेंस में जुटने का उद्देश्य यह है कि सभी लोग दीन की तरफ बढ़े और दुनिया को भी सुरक्षित रखें। फिजूल खर्चे से बचें, दिखावा अल्लाह ताला को पसंद नहीं है।

इस्लाम मोहब्बत व भाईचारे का पैगाम देता है। मां बाप की सेवा करने वाला दुनिया में सबसे सुखी इंसान है। इस मौके पर हजरत अल्लामा हाशिम अशर्फी कानपुरी ने कहा कि आज नौजवान दीन से भटक रहा है इसी वजह से वह परेशान भी है। मस्जिदों को आबाद करें और नेकी के रास्ते पर चलें।

अंत में उन्होंने दुआ के साथ प्रोग्राम खत्म कराया। जबकि इससे पूर्व तिलावते कलाम पाक से कान्फ्रेंस की शुरुआत हाफिज कारी आरिफ मुशाहिदी ने की। इसके बाद फैजान रज़ा व तस्कीन रजा बरेली ने नात पाक से माहौल को काफी खुशनुमा बना दिया।

नवीना शायर मोहसिन रजा ने भी अपना कलाम सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया। प्रोग्राम में ताहिर रजा रामपुरी ने भी अपना कलाम पेश किया। कान्फ्रेंस की अध्यक्षता दारुल उलूम अहले सुन्नत गरीब नवाज बैदौला चौराहा के प्रबंधक मौलाना मकसूद अकरम व संचालन हाफिज दिलशाद फारूकी ने किया।

इस मौके पर हाफिज अरबाब फारुकी, मौलाना अरशदुउल कादरी, मौलाना सफीक निजामी, कारी अबरार अहमद, हाफिज एतवार, मौलाना शेखआबिद अली, समसुद्दीन उर्फ माने फारूकी , अफजानुल हक फारुकी, रियाजुल हक उर्फ भुट्टू,जहीर फारुकी ग्राम प्रधान प्रतिनिधि, अब्दुल रशीद फारुकी, अहमद हुसैन, जियाउल हक, करम हुसैन, शहजाद हुसैन फारूकी , सनाउद्दीन फारूकी , इसरार अहमद फारूकी, फखरुद्दीन हाफिज एहसानुल्लाह, पत्रकार शहाबुद्दीन फारूकी ,अलाउद्दीन फारुकी, शाहनवाज हुसैन उर्फ सालार, जलाल अहमद ,अजहर हुसैन फारूकी ,शाहिद हुसैन फारूकी, मोहम्मद हसनैन फारुकी आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।