रक्षाबंधन: वैदिक युग से आधुनिक भारत तक भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा का पवित्र पर्व

परमात्मा उपाध्याय की रिपोर्ट

सिद्धार्थनगर। श्रावणी पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला रक्षाबंधन आज पूरे देश में उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र, सुरक्षा और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, जबकि भाई जीवन भर बहन की रक्षा का वचन देते हैं। यह पर्व केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक भी है।

वैदिक युग से प्रारंभ हुई परंपरा
भविष्योत्तर पुराण के अनुसार, जब देवताओं के राजा इंद्र असुरों से युद्ध में हार रहे थे, तब उनकी पत्नी इंद्राणी ने उनके दाहिने हाथ में रक्षा सूत्र बांधा। इस पवित्र धागे ने इंद्र में साहस का संचार किया और वे विजयी हुए। यही परंपरा समय के साथ पुरोहितों द्वारा यजमानों को रक्षा सूत्र बांधने और बाद में बहनों द्वारा भाइयों को राखी बांधने में परिवर्तित हो गई।

पौराणिक कथाओं में रक्षाबंधन का महत्व
महाभारत के अनुसार, श्रावण पूर्णिमा के दिन द्रौपदी ने श्रीकृष्ण की घायल उंगली पर अपनी साड़ी का टुकड़ा बांधा, जिसे कृष्ण ने जीवनभर निभाया। एक अन्य कथा में, पांडव युधिष्ठिर ने युद्ध से पहले कृष्ण से सुरक्षा का उपाय पूछा, तो उन्होंने राखी की शक्ति का महत्व बताया।

इतिहास के पन्नों में रक्षाबंधन
राजपूत परंपराओं में युद्ध पर जाने से पहले महिलाएं अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर रेशमी धागा बांधती थीं, जिससे विजय और सुरक्षित वापसी का विश्वास मिलता था। मेवाड़ की रानी कर्णावती द्वारा मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेजना और सिकंदर की पत्नी द्वारा राजा पोरस को राखी बांधकर युद्ध टालना, इस पर्व की ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाता है।

क्षेत्रीय परंपराएं और सामाजिक संदेश
किशनगढ़ी का “सलूनो” उत्सव भी इसी परंपरा से जुड़ा है, जिसमें विवाहित बेटियां अपने अविवाहित बहनों और भाइयों को जौ का तिलक लगाकर उपहार प्राप्त करती हैं। विभिन्न समुदायों में बहनें अपनी बहनों को भी राखी बांधती हैं, जिससे यह त्योहार भाई-बहन से आगे बढ़कर सार्वभौमिक प्रेम और सुरक्षा का संदेश देता है।

संस्कृत दिवस भी आज
श्रावणी पूर्णिमा को संस्कृत दिवस के रूप में भी मनाया जाता है, जो भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, वेद, पुराण, आयुर्वेद, गणित और योग की भाषा के सम्मान का प्रतीक है।

रक्षाबंधन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि विश्वास, त्याग और प्रेम से बुना वह पवित्र बंधन है जो पीढ़ियों से भारतीय समाज को एकजुट करता आ रहा है। यह पर्व हमें सिखाता है कि रिश्तों में सुरक्षा, सम्मान और विश्वास ही सबसे बड़ी ताकत है।