📅 Published on: August 14, 2025
गुरु जी की कलम से
बढ़नी, सिद्धार्थनगर। विकासखंड कार्यालय बढ़नी का परिसर गुरुवार को महिलाओं की आस्था का केंद्र बना रहा। नगर पंचायत बढ़नी एवं आसपास के गांवों की तमाम महिलाएं यहां पहुंचकर ललही छठ (हरछठ) पर्व की पूजा कर रही थीं। परिसर में स्थित वट वृक्ष के नीचे महिलाएं पूजा-अर्चना के बाद विश्राम करती नजर आईं।
इस पार्क और परिसर का सुंदरीकरण तत्कालीन विकासखंड अधिकारी सतीश सिंह की देखरेख में हुआ था। उनकी सोच और प्रयास से यहां आकर्षक पार्क का निर्माण कराया गया, जो अब धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों का प्रिय स्थल बन चुका है।
इस साल ललही छठ का पर्व 14 अगस्त 2025, गुरुवार को मनाया जा रहा है। षष्ठी तिथि का आरंभ सुबह 4:23 बजे हुआ और समापन रात 2:07 बजे होगा। इस दिन भगवान बलराम, शीतला माता और कुछ स्थानों पर अन्नपूर्णा देवी या गृह लक्ष्मी की पूजा की जाती है। पूजा में भैंस का दूध, घी, दही, महुआ फल, ज्वार के बीज, सात प्रकार के अनाज, गोबर, हल्दी, मिट्टी के कुल्हड़, तालाब में उगाए चावल आदि का विशेष महत्व है।
परंपरा के अनुसार महिलाएं सुबह महुआ के दातून से दांत साफ कर स्नान कर व्रत का संकल्प लेती हैं। घर की दीवार पर गोबर से छठ माता, हल, पशु और किसान के चित्र बनाए जाते हैं। चौकी पर कलश स्थापित कर भगवान गणेश और माता पार्वती की पूजा की जाती है। पूजा के बाद महिलाएं महुआ के पत्तों पर महुआ फल और भैंस के दूध से बनी दही का सेवन करती हैं।
हल छठ को कृषि संस्कृति, मातृत्व और संतान सुख से जुड़ा पर्व माना जाता है। विशेष रूप से वैष्णव परंपरा, गृहस्थ स्त्रियां और कृषक परिवार इस पर्व को बड़े उत्साह से मनाते हैं।