फर्जीवाड़ा और भौकाल ! ‘राहत हॉस्पिटल’ सील, अवैध पंजीकरण के साथ पत्रकार को धमकी और मजिस्ट्रेट से बदसलूकी!

बढ़नी कसबे में में बस स्टॉप तिराहे पर एक BUMS डॉक्टर की क्लिनिक पर खुले आम डिलीवरी और एबॉर्शन – सूत्र 

पिछली कार्यवाही में बंद एक अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की चेतावनी के बाद भी MBBS डॉक्टर कि तैनाती नहीं ओप्रेसन के बाद BUMS डॉक्टर संभालता है कमान मरीज की जान के साथ खिलवाड़ कब तक

गुरु जी की कलम से 

बढ़नी, सिद्धार्थनगर। नगर पंचायत क्षेत्र बढ़नी के बढ़नी-इटवा रोड पर स्थित राहत हॉस्पिटल सर्जिकल एवं जच्चा बच्चा केंद्र पर मंगलवार को जिलाधिकारी के आदेश पर बड़ी और कड़े तेवर वाली कार्रवाई की गई है। अस्पताल पर न सिर्फ अवैध पंजीकरण के आधार पर संचालन का आरोप है, बल्कि जांच के दौरान अस्पताल प्रबंधन की ओर से पत्रकारों को धमकी देने और ड्यूटी पर तैनात मजिस्ट्रेट से बदसलूकी करने का गंभीर मामला भी सामने आया है। इस दोहरी अनियमितता के चलते प्रशासन ने ओपीडी सहित कुल चार कमरों को सील कर दिया है।

यह कार्रवाई तब अमल में लाई गई जब जनसंदेश टाइम्स स्थानीय समाचार पत्र में अस्पताल के बिना रजिस्ट्रेशन संचालित होने संबंधी ख़बर प्रकाशित हुई, जिसके बाद जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर. को शिकायत मिली थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल संज्ञान लिया और उच्च-स्तरीय टीम को जांच के लिए मौके पर भेजा।

जांच में फर्जी सर्टिफिकेट, चार कमरों पर लगा ताला

एसीएमओ (नोडल नैदानिक स्थापना) डॉ. प्रमोद कुमार और मजिस्ट्रेट तहसीलदार अजय कुमार की उपस्थिति में टीम ने अस्पताल के दस्तावेज़ों की गहनता से पड़ताल की। इस मौके पर अस्पताल प्रबंधन रजिस्ट्रेशन से संबंधित कोई भी वैध दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं कर सका। अधिकारियों को जो सर्टिफिकेट दिखाया गया, वह भी जांच में फर्जी पाया गया, जिसकी पुष्टि डॉ. प्रमोद कुमार ने की उन्होंने बताया कि यह उनके विभाग द्वारा जारी नहीं किया गया था।

इतना ही नहीं, जांच के दौरान अस्पताल प्रबंधन के कर्मचारियों ने खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकारों को धमकाने की कोशिश की और अपनी अनियमितताओं को छिपाने के प्रयास में जांच दल में शामिल मजिस्ट्रेट अजय कुमार से बदसलूकी भी की।

अवैध रूप से स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने, सरकारी नियमों के उल्लंघन और जांच टीम के साथ दुर्व्यवहार की पुष्टि होते ही अस्पताल की ओपीडी और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों सहित कुल चार कमरों को सील कर दिया गया।

प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की गई यह कार्रवाई क्षेत्र में चल रहे अन्य अवैध अस्पतालों के लिए एक सख्त चेतावनी है कि फर्जीवाड़ा और गुंडागर्दी दोनों बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस दौरान प्रभारी चिकित्सा अधिकारी बढ़नी अविनाश कुमार, फार्मेसिस्ट राम सहाय सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।