📅 Published on: October 31, 2025
गुरु जी की कलम से
सिद्धार्थ नगर : 31 अक्टूबर 2025 को भारत ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में देश के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती मना रहा है। पूरे देश में, खासकर गुजरात के केवड़िया में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर, उनकी जयंती को भव्य कार्यक्रमों के साथ मनाया जा रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे।
भारत के एकीकरण में अद्वितीय योगदान
सरदार वल्लभभाई पटेल (जन्म: 31 अक्टूबर 1875, नाडियाद, गुजरात) को उनके अद्वितीय योगदान, विशेष रूप से स्वतंत्रता के बाद 560 से अधिक रियासतों को भारतीय संघ में एकीकृत करने के लिए याद किया जाता है। उनकी दूरदर्शिता, सूझ-बूझ और दृढ़ संकल्प ने भारत का राजनीतिक एकीकरण संभव किया। उन्होंने हैदराबाद के निजाम को भारतीय संघ में शामिल करने के लिए ‘ऑपरेशन पोलो’ जैसी सैन्य कार्रवाई करने से भी गुरेज नहीं किया।
स्वतंत्रता संग्राम के ‘सरदार’ और ‘लौह पुरुष’
शुरुआती जीवन और शिक्षा: एक किसान परिवार में जन्मे पटेल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नाडियाद में पूरी की और बाद में इंग्लैंड के मिडिल टेम्पल से कानून की पढ़ाई की।
गांधीजी का साथ: 1913 में भारत लौटने के बाद, उन्होंने महात्मा गांधी के नेतृत्व में खेड़ा सत्याग्रह और बारडोली सत्याग्रह जैसे प्रमुख आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई।
सरदार’ की उपाधि: बारडोली सत्याग्रह के सफल नेतृत्व के बाद, वहाँ के किसानों ने उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि दी। उन्होंने हमेशा पीड़ितों और किसानों के पक्ष में लड़ाई लड़ी।
‘लौह पुरुष’: देश के प्रति उनके दृढ़ संकल्प और मजबूत नेतृत्व के कारण उन्हें भारत का ‘लौह पुरुष’ और ‘राष्ट्रीय एकता के स्तंभ’ कहा जाता है।
प्रशासनिक सुधार और विरासत
सरदार पटेल ने देश की प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) सहित अखिल भारतीय सेवाओं (ऑल इंडिया सर्विसेज) के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिन्हें आज भी देश की प्रशासनिक रीढ़ कहा जाता है।
उनकी याद में, गुजरात के केवड़िया में 182 मीटर ऊँची “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” बनाई गई है, जो विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा है।
राष्ट्रीय एकता दिवस’ का उत्सव
केंद्र सरकार ने 2014 से सरदार पटेल की जयंती को ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में घोषित किया। इस अवसर पर देश भर में ‘रन फॉर यूनिटी’, परेड, श्रद्धांजलि समारोह और विद्यालयों में निबंध प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं।
सरदार पटेल का निधन 15 दिसंबर 1950 को हुआ, लेकिन उनका जीवन देशप्रेम, त्याग और सामूहिकता का प्रतीक बना हुआ है। उनका कथन – “मेरी एकता ही मेरी ताकत है और मेरी ताकत ही मेरा राष्ट्र है।” – आज भी देश की युवा पीढ़ी को प्रेरणा देता है। उनकी जयंती हमें यह याद दिलाती है कि विविधता में एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।