📅 Published on: October 31, 2025
गुरु जी की कलम से खास रिपोर्ट
नई दिल्ली: देश की पूर्व और एकमात्र महिला प्रधानमंत्री, स्वर्गीय इंदिरा गांधी, को आज 31 अक्टूबर को उनकी 41वीं पुण्यतिथि पर याद किया गया और भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। उनके साहसिक नेतृत्व और 10 कड़े फैसलों ने उन्हें हमेशा के लिए ‘आयरन लेडी’ का खिताब दिलाया।
शक्ति स्थल पर अर्पित की गई श्रद्धांजलि
इस अवसर पर, कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने नई दिल्ली स्थित शक्ति स्थल पर जाकर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। श्रद्धांजलि देने वालों में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा सांसद राहुल गांधी प्रमुख थे। इनके अलावा, अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी देश के लिए उनके योगदान को याद किया।
भारत को नई पहचान देने वाले प्रमुख फैसले
इंदिरा गांधी के कार्यकाल को कई ऐतिहासिक और निर्णायक फैसलों के लिए जाना जाता है, जिन्होंने भारत को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दी:
1971 में पाकिस्तान को पराजित कर बांग्लादेश का निर्माण
बैंकों का राष्ट्रीयकरण
भारत का परमाणु परीक्षण
हरित क्रांति को बढ़ावा
ये फैसले भारत की आर्थिक, कृषि और सामरिक शक्ति के लिए मील का पत्थर साबित हुए।
इंदिरा गांधी: एक संक्षिप्त परिचय
इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवंबर, 1917 को इलाहाबाद में हुआ था। वह भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की बेटी थीं।
शिक्षा: उन्होंने विश्व-भारती विश्वविद्यालय और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की।
राजनीतिक जीवन: वह 1938 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुईं और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 1942 में जेल भी गईं।
प्रधानमंत्री कार्यकाल:
पहला कार्यकाल: 1966 से 1977 तक (लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद)।
दूसरा कार्यकाल: 1980 से 1984 तक।
सम्मान: उन्हें 1972 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
एक दुखद अंत और देशव्यापी असर
इंदिरा गांधी की हत्या 31 अक्टूबर, 1984 को उनके अपने ही अंगरक्षकों द्वारा कर दी गई थी। इस दुःखद घटना के बाद देश भर में, विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में, सिख विरोधी दंगे भड़क उठे थे, जिससे देश में गहरे डर और दर्द का माहौल पैदा हो गया था।
इंदिरा गांधी की विरासत भारतीय राजनीति में हमेशा एक शक्तिशाली और विवादित अध्याय रहेगी, लेकिन राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को कभी नहीं भूला जा सकता। उनकी हत्या के बाद, उनके बेटे राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था।