नेपाल सीमा से सटे बढ़नी में ‘स्मैक’ का जाल: नशेड़ियों और तस्करों के लिए पुड़िया हुई ‘आम’
📅 Published on: October 31, 2025
गुरु जी की कलम से
बढ़नी: भारत-नेपाल सीमा से सटे नगर पंचायत क्षेत्र बढ़नी और कृष्णानगर कस्बा अब स्मैक और अन्य सूखे नशों के कारोबार का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। बलरामपुर की ओर से आ रहे इस गोरखधंधे ने भारत और नेपाल दोनों देशों की युवा पीढ़ी को बुरी तरह जकड़ लिया है।
’गुरु जी की कलम’ से मिले इनपुट के अनुसार, नगर पंचायत क्षेत्र बढ़नी में नशे की पुड़िया की बिक्री अब आम बात हो गई है, लेकिन यह केवल नशेड़ियों और तस्करों तक ही सीमित है।
नव धनाढ्य बना रहा नशे का कारोबार, तकनीक का हो रहा इस्तेमाल
नशीले पदार्थों के सौदागर अपने पुराने अनुभव और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे अपने ग्राहकों को भली-भांति पहचान कर ही पुड़िया बेचते हैं।
बिक्री का केंद्र: सड़क किनारे, रेलवे स्टेशन के पास, गलियों और विशेष रूप से वार्ड नंबर 3 और माधवा नगर के आसपास दिन-रात युवाओं की भीड़ नशे की पुड़िया की तलाश में घूमती दिखाई देती है।
संगठित गिरोह: नशे के कारोबारी इतने संगठित हैं कि वे कैमरे और मॉनिटरिंग सिस्टम से ग्राहकों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं। पहचान सुनिश्चित करने के बाद ही स्मैक की डिलीवरी की जाती है। यह सिंडिकेट प्रशासन को खुली चुनौती दे रहा है।
माली हालत में अंतर: स्मैक के कारण कई परिवार उजड़ चुके हैं, जबकि इस धंधे में लगे लोगों की माली हालत दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ रही है। भारी मुनाफे को देखते हुए कई लोगों ने लुके-छुपे यह धंधा शुरू कर दिया है। ढेबरुआ थाना क्षेत्र के मधवानगर मार्ग और रेलवे स्टेशन के आसपास शाम ढलते ही 200 से 300 रुपये में स्मैक की पुड़िया आसानी से मिल जाती है।
प्रशासन पर ‘दिखावे’ की कार्रवाई का आरोप
स्थानीय लोगों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित है।
स्थानीय आरोप: “जब कभी दबाव बनता है, तो बड़े कारोबारियों पर शिकंजा कसने के बजाय, नशे के आदी युवाओं को कुछ पुड़ियों के साथ पकड़कर उन्हें जेल भेज दिया जाता है।”


