📅 Published on: December 28, 2025
नियमतुल्लाह खान
सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद अंतर्गत खेसरहा वन रेंज में पेड़ों की अवैध कटान का एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है। विभाग द्वारा जारी परमिट की आड़ में ठेकेदारों द्वारा जंगल की हरियाली पर सरेआम कुल्हाड़ी चलाई जा रही है। ताज़ा मामले में, जहाँ विभाग ने केवल पांच पेड़ों की कटान की अनुमति दी थी, वहीं मौके पर छह पेड़ जमींदोज कर दिए गए।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वन विभाग ने 27 दिसंबर 2025 तक की समय सीमा के भीतर पांच पेड़ों को काटने का परमिट जारी किया था। हालांकि, परमिट की शर्तों को ताक पर रखते हुए एक अतिरिक्त पेड़ काट लिया गया। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि खेसरहा रेंज में यह खेल लंबे समय से चल रहा है। यहाँ अक्सर कम पेड़ों के परमिट पर अधिक पेड़ों की कटान की जाती है, जिससे राजस्व और पर्यावरण दोनों को भारी क्षति पहुँच रही है।
रेंजर ने स्वीकारी गड़बड़ी, पर कार्रवाई सिफर।
इस प्रकरण में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि स्वयं रेंजर सुनील यादव ने स्वीकार किया है कि केवल चार महुआ और एक आम के पेड़ (कुल 5 पेड़) के कटान की अनुमति दी गई थी, जबकि मौके पर 6 पेड़ों की कटान पाई गई है। विभागीय पुष्टि के बावजूद अब तक न तो दोषियों पर कोई जुर्माना लगाया गया है और न ही कोई दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की गई है।
मुख्य बिंदु और ग्रामीणों के आरोप:
* मिलीभगत का संदेह: ग्रामीणों का आरोप है कि रेंजर और क्षेत्रीय वनकर्मियों की मिलीभगत के बिना यह अवैध कटान संभव नहीं है।
* शिकायतों की अनदेखी: बार-बार शिकायत के बाद भी न तो मौके का सही निरीक्षण होता है और न ही दोषियों के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाए जाते हैं।
* पर्यावरण को खतरा: आम और महुआ जैसे फलदार और बहुमूल्य पेड़ों की अंधाधुंध कटान से क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ रहा है।
प्रशासनिक चुप्पी पर उठते सवाल
जब स्वयं जिम्मेदार अधिकारी अतिरिक्त कटान की बात मान रहे हैं, तो आखिर कार्रवाई की फाइल कहाँ अटकी है? क्या खेसरहा रेंज अवैध लकड़ी माफियाओं की सुरक्षित शरणस्थली बन चुका है? प्रशासन की चुप्पी इस पूरे सिंडिकेट की ओर इशारा कर रही है।
5 पेड़ों के परमिट पर 6 का कटान न केवल चोरी है, बल्कि यह विभाग की कार्यप्रणाली पर एक गहरा धब्बा है। उच्च अधिकारियों को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।” — स्थानीय निवासी।