बाणगंगा नदी हादसा: दोस्त को बचाने में डूबे तीन साथी, दूसरे दिन बरामद हुए शव; गांव में पसरा मातम

Kapilvastupost
**सिद्धार्थनगर (शोहरतगढ़)।**
दोस्ती की मिसालें अक्सर दी जाती हैं, लेकिन शोहरतगढ़ के बैदौली घाट पर जो हुआ, उसने दोस्ती की एक ऐसी दर्दनाक तस्वीर पेश की जिसे सोचकर ही रूह कांप उठती है। बाणगंगा नदी में डूबे तीनों दोस्तों के शव घटना के दूसरे दिन शुक्रवार दोपहर लगभग एक बजे बरामद कर लिए गए। स्थानीय मछुआरों और गोताखोरों की मदद से जैसे ही शव नदी से बाहर निकाले गए, घाट पर मौजूद परिजनों के चीत्कार से पूरा माहौल गमगीन हो उठा।
दादी को अंतिम विदाई देने दिल्ली से आया था शिवा
18 वर्षीय शिवा चौहान दिल्ली में रहकर काम करता था। गुरुवार सुबह ही वह अपनी दादी कंचन के अंतिम संस्कार में शामिल होने गांव आया था। अंतिम संस्कार के बाद जब वह बैदौली घाट पर बाणगंगा नदी में स्नान करने उतरा, तो गहरे पानी का अंदाजा न होने के कारण डूबने लगा। शिवा को छटपटाता देख किनारे खड़े उसके बचपन के दोस्त रवि ने एक पल गंवाए बिना नदी में छलांग लगा दी। तेज बहाव में जब रवि भी फंसने लगा, तो किनारे खड़े तीसरे दोस्त मोनू से रहा नहीं गया और वह भी दोनों को बचाने पानी में कूद पड़ा।
तीनों को डूबता देख रिश्तेदार राहुल ने भी अपनी जान जोखिम में डालकर नदी में छलांग लगाई और मोनू को पकड़ने की भरसक कोशिश की, लेकिन पानी के प्रचंड वेग के आगे उसकी एक न चली। राहुल किसी तरह तैरकर किनारे पहुंचा और अपनी जान बचा सका। देखते ही देखते तीनों दोस्त लहरों के बीच ओझल हो गए।
‘भैया… भैया…’ पुकारती रही बहन, गश खाकर गिरा छोटा भाई
हादसे के बाद बैदौली घाट का नजारा किसी का भी कलेजा छलनी करने वाला था। शिवा की छोटी बहन घाट की मिट्टी को पकड़े लगातार *”भैया… भैया…”* चिल्लाती रही, तो वहीं भाई के डूबने का सदमा न सह पाने के कारण छोटा भाई कृष मौके पर ही बेहोश हो गया, जिसे ग्रामीणों ने अस्पताल पहुंचाया।
शुक्रवार को जब शिवा का शव बाहर आया, तो मां उर्मिला उससे लिपटकर बार-बार बेटे को उठने की गुहार लगाती रहीं। वहीं दिल्ली में मजदूरी करने वाले रवि और घर का सहारा बनने वाले मोनू की मां कुसुम का रो-रोकर बुरा हाल था।
स्थानीय गोताखोरों ने कड़ी मशक्कत के बाद निकाले शव
गुरुवार देर शाम तक एसडीआरएफ और पुलिस की टीम ने तलाशी अभियान चलाया, लेकिन अंधेरा होने के कारण अभियान रोकना पड़ा था। शुक्रवार सुबह साधुनईढ़ूर गांव के 12 स्थानीय गोताखोरों और युवाओं ने बड़े जाल की मदद से खोजबीन शुरू की और एक-एक करके तीनों शवों को बाहर निकाला।
स्थानीय विधायक विनय वर्मा ने जान जोखिम में डालकर मदद करने वाले युवाओं (रामपाल निषाद, राजू निषाद, रोहित निषाद, रिंकू निषाद, सुग्रीम निषाद, बजरंगी निषाद, राहुल निषाद, अखिलेश निषाद, रामू निषाद, चन्द्रकेश निषाद, भुलई निषाद तथा लादूराम निषाद) को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया और उनके साहस की सराहना की।
पुलिस ने शिवा के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, जबकि रवि और मोनू के परिजनों के अनुरोध पर प्रशासन ने बिना पोस्टमार्टम के शव उन्हें सौंप दिए।
घाटो की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
बैदौली घाट पर पहले भी ऐसे हादसे हो चुके हैं। बीते 29 मई 2024 को भी जोखबलिया गांव के दो किशोर (अखिलेश यादव और अखिलेश यादव) इसी घाट पर नहाते समय डूब गए थे। बार-बार हो रही इन घटनाओं के बाद अब स्थानीय प्रशासन और घाटों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।