शिकंजा: बढ़नी में दवा व्यवसायी के घर देर रात छापेमारी; 9900 नाइट्राजेपाम टैबलेट और 120 बोतल कोडीन सिरप के अवैध डायवर्जन में कार्रवाई तेज

गुरु जी की कलम से
**बढ़नी (सिद्धार्थनगर)**
मादक एवं प्रतिबंधित दवाओं के कथित अवैध डायवर्जन के खिलाफ जारी जांच के तहत शनिवार देर रात नगर पंचायत बढ़नी के आर्य समाज रोड स्थित एक दवा व्यवसायी के आवास पर प्रशासन और संबंधित विभागों की संयुक्त टीम ने अचानक छापेमारी की। समाचार लिखे जाने तक मौके पर तलाशी और जांच की कार्रवाई जारी थी। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी किसी बरामदगी या आधिकारिक कार्रवाई का विवरण साझा नहीं किया गया है।
जून में मुंबई NCB ने किया था मामले का खुलासा
यह पूरी कार्रवाई जून माह में सामने आए उस चर्चित प्रकरण से जुड़ी बताई जा रही है, जब नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की मुंबई जोनल इकाई ने बढ़नी के लोहिया नगर स्थित थोक दवा फर्म **’मेसर्स शशी फार्मा’** पर छापेमारी की थी। उस दौरान टीम ने भारी मात्रा में कोडीनयुक्त प्रतिबंधित दवाएं बरामद करने का दावा किया था। मामले में कार्रवाई करते हुए NCB ने फर्म के प्रोप्राइटर **मनीष कुमार अग्रवाल** को गिरफ्तार कर मुंबई भेजा था, जो फिलहाल न्यायिक अभिरक्षा में हैं।
जांच में खुलीं खामियां, लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति
NCB की रिपोर्ट के आधार पर औषधि विभाग द्वारा विभागीय जांच शुरू की गई। जिला औषधि निरीक्षक **मनोज कुमार सिंह** की पड़ताल में सामने आया कि फर्म आवश्यक अभिलेख और रिकॉर्ड प्रस्तुत करने में विफल रही।
इसके अलावा, जांच में **9900 नाइट्राजेपाम टैबलेट** तथा **120 बोतल कोडीनयुक्त सिरप** के अवैध डायवर्जन के तार भी इसी फर्म से जुड़े पाए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स अधिनियम, 1940 के तहत फर्म का ड्रग लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति सहायक आयुक्त (औषधि), बस्ती मंडल को भेज दी गई है। इस पर अंतिम निर्णय सक्षम लाइसेंसिंग प्राधिकारी द्वारा लिया जाएगा।
बताते चलें कि यदि जांच के दौरान सामने आए ये गंभीर आरोप विधिसम्मत कानूनी प्रक्रिया में सिद्ध होते हैं, तो यह महज एक फर्म पर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि युवाओं और समाज को नशे के घातक जाल से बचाने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
इसके साथ ही कानून का तकाजा यह भी कहता है कि किसी भी मामले में अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी और न्यायिक प्रक्रिया के पूरे होने के बाद ही माना जाए। निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई ही ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर जनता के विश्वास को मजबूती प्रदान करती है।